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जनजातीय संग्रहालय में दिखेगी 70 देशों की ट्राइबल लाइफ

सौगात : संग्रहालय की गैलरी नंबर-1 में बन रहा 'सांस्कृतिक वैविध्य' केंद्र, एक साल में बनकर तैयार होगी नई गैलरी

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Tribal museum

जनजातीय संग्रहालय में दिखेगी 70 देशों की ट्राइबल लाइफ

भोपाल। जनजातीय संग्रहालय में जल्द ही 70 देशों की प्राचीन आदिवासी संस्कृति और परंपरा देखने को मिलेगी। यहां गैलरी नंबर-1 में सांस्कृतिक वैविध्य केंद्र बनाया जा रहा है।

इस केंद्र में अफ्रीका से लेकर अमेरिका और भारत के विभिन्न प्रांतों में बसे आदिवासियों के जीवन को दीवारों पर उकेरा जाएगा। विभिन्न देशों की ट्राइबल लाइफ को समझने के लिए करीब दो साल से रिसर्च संग्रहालय के एक्सपर्टस की टीम रिसर्च कर रही है।

इसके लिए लिटरेचर और इंटरनेट की मदद ली जा रही है। गैलरी का करीब चालीस फीसदी काम पूरा हो चुका है। एक साल में दर्शकों को ट्रेडिशनल लाइफ की झलक देखन को मिलेगी।

इस हॉल को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि हॉल के बीच हिस्से का वट वृक्ष सब कुछ अपने आप में सिमेटे हुआ सा लगेगा। इसकी शाखाओं पर दर्शक ट्राइबल के ट्रेडिशन को देख सकेंगे।

जनजातीय संग्रहालय के संग्रहालय अध्यक्ष अशोक मिश्रा ने बताया कि आदिवासी परंपराओं में बरगद के वृक्ष का विशेष स्थान है। इसलिए इस हॉल के सेंटर में बरगद पेड़ डिजाइन कराया जा रहा है।

आदिवासी जनजातियों का कहीं न कहीं अफ्रीका से जुड़ाव है, जिसे देखते हुए गैलरी में अफ्रीकी संस्कृति को प्रमुखता से शामिल किया जा रहा है। बरगद प्रदेश का राजकीय चिन्ह भी है। ये मानचित्र के बीच फैलता सा प्रतिक होगा।

देश के पांच राज्यों की मिलेगी झलक
भौगोलिक रूप से मध्यप्रदेश की भारत के नक्शे में केन्द्रीय उपस्थिति है। इसकी सीमाएंं पांच अन्य स्टेट को छूती हैं। दीर्घा के मध्य भाग में प्रदेश का त्रि-आयामी मानचित्र तैयार किया जाएगा, जिस पर प्रदेश की सभी प्रमुख छह जनजातियों की प्रतीकात्मक उपस्थिति दर्शाई जाएगी।

दीर्घा में एक स्थान से उठती सीढिय़ां ऊपर जाकर सर्पिलाकार रैम्प से जुडग़ी। ग्राउंड फ्लोर पर मप्र व आसपास के राज्यों की सांस्कृति झलक देखने को मिलेगी। इससे दर्शक उनकी लाइफ स्टाइल के फर्क को जान सकेंगे। वहीं फस्र्ट फ्लोर पर दर्शक रैम्प पर चढ़कर दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों पर तैयार दीर्घा और मानचित्र की परिक्रमा करते हुए विहंगम दृश्य का आनंद ले सकेंगे।

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