
UGC guidelines (Photo Source: AI Image)
MP News: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की स्पष्ट गाइडलाइन के बावजूद प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 62 वर्ष की आयु पार कर चुके प्रोफेसर पीएचडी गाइड बने हुए हैं। नियमों के अनुसार 62 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षक नए शोधार्थियों के गाइड नहीं बन सकते। बावजूद बड़ी संख्या में शोधार्थियों का पंजीयन उनके अधीन जारी है। इससे न केवल यूजीसी नियमों की अनदेखी सामने आ रही है, बल्कि शोध की गुणवत्ता और समयबद्धता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, प्रदेशभर में ऐसे प्रोफेसरों की संख्या करीब 150 तक पहुंच सकती है, जो उम्र सीमा पार करने के बाद भी गाइड की भूमिका निभा रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (बीयू) ने ऐसे प्रोफेसरों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है, जिनकी आयु 62 वर्ष पूरी हो चुकी है। विवि स्तर पर इस संबंध में डेटा संकलन किया जा रहा है, ताकि यूजीसी नियमों के अनुरूप आगे की कार्रवाई तय की जा सके।
यूजीसी गाइडलाइन का पालन किया जाएगा, नियम के बाबजूद यदि को पीएचडी गाइड बना है तो रिकॉर्ड चेक कर इनकी सूची तैयार कराई जाएगी। डॉ. समर बहादुर सिंह, कुलसचिव, बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएचडी की न्यूनतम अवधि तीन वर्ष होती है, जबकि शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित है। ऐसे में 62 वर्ष के बाद नए शोधार्थी लेने पर शोध कार्य समय पर पूर्ण कराना कठिन हो जाता है। इसका सीधा असर शोधार्थियों के अकादमिक भविष्य पर पड़ता है। हालांकि शिक्षाविदों ने यह भी कहा कि गाइड बनने से प्रोफेसर्स को प्रमोशन, सीआर और अकादमिक प्रभाव में लाभ मिलता है। इसलिए कई शिक्षक उम्र सीमा पार होने के बावजूद गाइड बने रहने की इच्छा रखते हैं।
Published on:
20 Feb 2026 04:40 pm
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