
ukraine russia war , यूक्रेन रशिया विवाद, एमबीबीएस करने के बावजूद छात्र यह शर्मनाक काम करने को मजबूर, जाने क्यों,ukraine russia war , यूक्रेन रशिया विवाद, एमबीबीएस करने के बावजूद छात्र यह शर्मनाक काम करने को मजबूर, जाने क्यों,ukraine russia war , यूक्रेन रशिया विवाद, एमबीबीएस करने के बावजूद छात्र यह शर्मनाक काम करने को मजबूर, जाने क्यों
यूक्रेन और रशिया के बीच युदध में हजारों भारतीय मेडिकल स्टूडेंट्स यूक्रेन में फंसे हुए हैं। भारत सरकार लगातार इन छात्रों को निकालने के लिए लगातार ऑपरेशन चला रही है। अब तक करीब १८ हजार छात्रों को भारत वापस लाया जा चुका है। लेकिन क्या आपको पता है कि एमबीबीएस करने यूक्रेन या अन्य रशियन यूनियन कंट्रीज में गए छात्रों का देश में क्या भविष्य है। हजारों छात्र एमबीबीएस करने के बावजूद शर्मनाक काम करने के लिए मजूबर हैं।
अकेले मध्य प्रदेश में करीब 8000 ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने बीते १५ सालों में यूक्रेन या आसपास के देशों से एमबीबीएस की डिग्री तो है, लेकिन वे या तो कम्पाउंडर का काम कर रहे हैं या किसी डॉक्टर के असिस्टेंट बन गए।
दरअसल, इन छात्रों ने यूक्रेन, उजबेकिस्तान, कजाकिस्तान, अजरबैजान, बिस्बैक, किरगिस्तान से 20-20 लाख रुपए की फीस देकर एमबीबीएस की डिग्री ले ली। लेकिन यह छात्र भारत में डॉक्टरी के लायसेंस के लिए जरूरी स्क्रीनिंग टेस्ट या फ ॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (एफ एमजी) टेस्ट पास नहीं कर पाए। चिकित्सा शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बीते 15 साल में 348 छात्र ही ऐसे हैं जिनके पास डॉक्टरी करने का लायसेंस है।
भारत में मान्य नहीं है विदेशी डिग्री
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में इन देशों की डिग्री मान्य नहीं है। इन छात्रों को भारतीय चिकित्सा विज्ञान के अनुसार अपनी काबिलियत सिद्ध करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (एफ एमजी) टेस्ट पास करना पड़ता है। दोनों देशों के पाठ्यक्रम में जमीन आसमान का अंतर होने से अधिकतर छात्र इस टेस्ट में फेल हो जाते हैं। इन्हें मजबूरन अस्पतालों में कंपाउंडर या इसी तरह के अन्य पदों पर काम करना पड़ रहा है।
अब दलाल भेज रहे बांग्लादेश और म्यांमार भी
शहर में कई एजेंसियां ऐसी हैं जो नीट काउंसिलिंग में असफल छात्रों को विदेश में एमबीबीएस कराने का झांसा देती हैं। सिफज़् रशियन देश ही नहीं इन संस्थाओं ने बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों से एमबीबीएस का प्रचार करना भी शुरू कर दिया है। इन संस्थाओं के एजेंट बाहर के छात्रों पर नजर रखते हैं और वे विदेश से डिग्री के लिए छात्रों का पासपोर्ट, वीजा से लेकर पांच साल तक रहने खाने की व्यवस्था भी करते हैं।
विशेषज्ञ का कहना
विदेश और हमारे देश में भौगोलिक, सांस्कृतिक और पयाज़्वरण के आधार पर कई असमानताएं हैं। यूक्रेन और अन्य देश ठंडे स्थान हैं हमारे देश में गमीज़् ज्यादा पड़ती है। वहां और यहां की बीमारियों से लेकर दवाओं और इलाज के तरीकों में जमीन आसमान का अंतर है। ऐसे में छात्र एमबीबीएस होते हुए भी यहां की परीक्षा पास नहीं कर पाता। इसको पास किए बिना प्रैक्टिस नहीं की जा सकती। हर साल कई छात्र टेस्ट देते हैं।
- डॉ. सुबोध मिश्रा, पूवज़् अध्यक्ष एमपीएमसी
केस-01
कोहेफिजा में रहने जफर खान ने 2013 में उजबेकिस्तान से एमबीबीएस किया था। कई बार स्क्रीनिंग टेस्ट दिया, लेकिन पास नहीं हो सके। अब एक निजी अस्पताल में मैनेजमेंट संभाल रहे हैं।
केस-02
अरेरा कॉलोनी के समीर सोलंकी ने भी किर्गिस्तान से एमबीबीएस किया। लगातार स्क्रीनिंग टेस्ट दे रहे हैं। पास नहीं हुए तो अब बीएचएमएस कर रहे हैं। साथ-साथ एक अस्पताल में बतौर असिस्टेंट सेवाएं भी दे रहे हैं।
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Published on:
09 Mar 2022 10:08 pm

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