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पीने के पानी में घुला यूरेनियम, किडनी-लीवर सहित कैंसर का भी बढ़ रहा खतरा

प्रदेश के 10 से अधिक जिलों के पानी में रेडियोएक्टिव प्रदूषण फैल गया है, जिसके कारण किडनी-लीवर से संबंधित बीमारियों का खतरा है.  

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पीने के पानी में घुला यूरेनियम, किडनी-लीवर सहित कैंसर का भी बढ़ रहा खतरा

पीने के पानी में घुला यूरेनियम, किडनी-लीवर सहित कैंसर का भी बढ़ रहा खतरा

भोपाल. प्रदेश के 10 से अधिक जिलों के पानी में रेडियोएक्टिव प्रदूषण फैल गया है, जिसके कारण किडनी-लीवर से संबंधित बीमारियों का खतरा तो है ही सही, साथ ही कैंसर का खतरा भी मंडरा रहा है, मानक स्तर से अधिक यूरेनियम पानी में होने के कारण ये स्वास्थ के लिए काफी नुकसानदायक है।

भूजल में अभी तक फ्लोराइड, फॉस्फेट आदि का प्रदूषण मिला था, लेकिन अब 10 जिलों में रेडियोएक्टिव प्रदूषण ने सभी को परेशान कर दिया है। यहां के भूजल में यूरेनियम की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई है। यूरेनियम का सबसे ज्यादा प्रदूषण ग्वालियर के घाटीगांव, सिवनी और बैतूल जिलों में पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यूरेनियम मिश्रित पानी लगातार पीने से किडनी, लिवर संबंधी बीमारियों के साथ कैंसर का भी खतरा बढ़ता है। इसका खुलासा हुआ है केन्द्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में। बोर्ड ने यूरेनियम प्रदूषण की पूरे भारत में जांच की है। इसके लिए वर्ष 2020 में देश भर के कुओं और ट्यूबवेल आदि के 15 हजार सैंपल लिए गए थे। मध्यप्रदेश के सभी जिलों से 1191 भूजल के सैंपल लिए थे। इन सैंपल की जांच कर हाल ही में रिपोर्ट जारी की गई है।

जिला और स्थल यूरेनियम की मात्रा

ग्वालियर- घाटीगांव 233.9

ग्वालियर- टेकनपुर 58.5

सिवनी- केवलारी 203.3

सिवनी- कुरई 61.4

बैतूल 108.1

बैतूल -खेड़ी 39.4

बालाघाट- कटंगी 30.7

छतरपुर-बिजावर 47.5

छतरपुर- कुर्री 39.2

दतिया 96.7

दतिया- भाण्डेर 32.9

दतिया- इमलिया 51.9

झाबुआ- थांदला 75.0

पन्ना- शाहनगर 37.1

रायसेन- औबेदुल्लागंज 51.3

शिवपुरी- पिछोर 79.1

नोट- मात्रा माइक्रोग्राम प्रति लीटर या पीपीबी- पार्ट पर बिलियन में

वैज्ञानिक एसके सिंह के अनुसार, भूजल में यूरेनियम मिलने के प्राकृतिक कारणों में यूरेनियम वाली ग्रेनाइट चट्टानों से यह भूजल में रिसता रहता है। मानव जनित कारणों में खनिज से यूरेनियम निकालकर उसके अवशेष को ऐसे ही छोड़ देना, न्यूक्लियर इंडस्ट्री से रिसाव, फ्लाय ऐश और फॉस्फेट फर्टिलाइजर जिम्मेदार हो सकते हैं।

इन जिलों में मानक से ज्यादा यूरेनियम

बालाघाट, बैतूल, छतरपुर, दतिया, ग्वालियर, झाबुआ, पन्ना, रायसेन, सिवनी और शिवपुरी

पानी पीने से हो जाती किडनी डैमेज

मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अशोक द्विवेदी के अनुसार, यूरेनियम मिश्रित पानी पीने से किडनी डैमेज हो जाती है। लिवर पर भी इसका असर होने के साथ कैंसर का खतरा बढ़ता है। यूरेनियम के रेडियोएक्टिव प्रभाव की बजाय केमिकल प्रभाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं।