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हाथियों को बांधने के लिए होता था मोरान घर का उपयोग

मानव संग्रहालय में मोरान जनजातीय कलाकारों ने तैयार किया आवास
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हाथियों को बांधने के लिए होता था मोरान घर का उपयोग

भोपाल। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के वीथि संकुल प्रदर्शनी परिसर में असम के मोरान जनजातीय कलाकारों द्वारा विधिवत अनुष्ठानिक क्रिया की गई। इस अवसर पर संग्रहालय के एन सकमाचा सिंह, संग्रहालय एसोसिएट ने कहा की यह घर के सामने आंगन में स्थित अन्न भंडार घर है। इसकी संरचना अनुठी है। इसे 9 लकडिय़ों के बड़े ल_े पर पंक्तिबद्ध रखा जाता है। इस लकड़ी के ल_े को लोरिकाई कहते हैं। यह 3 से 5 फीट त्रिज्या वाले विशाल आकृति के होते है। मोरान संरचना में लोटिका का उपयोग संपूर्ण संरचना को मजबूत पकड़ बनाए रखता है। पुराने समय में मोरान घर हाथियों के नाम पर भी बनाए जाते थे और ये लोग इस अनाज भंडार में रखे अनाज का उपयोग अपने लिए कभी नहीं करते थे।

आज से दर्शकों के लिए रहेगा खुला

मोरान घर चार भुजाओं बाला ढांचा जो बांस को फाड़कर सींक को इस प्रकार एक-दूसरे से बनुकर बनाया जाता है कि पुरा घर लकड़ी के ल_े पर ही रखा होता है। ऊपर छत का निर्माण टोकों पत्ते या जेंगू पत्ता के सहारे से आकृति में किया गया है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि मोरान घर के अंदर रखे सुरक्षित अनाज को मोरान घर के सामने संकल से बंधे हाथी द्वारा खाया जाता है। मोरान घर के बाहरी दीवारों का इस्तेमाल हाथियों को बांधने के बड़ी-बड़ी रस्सियों को लटकाने और कृषि औजार तथा मछली पकडऩे के उपकरण को लटकाकर रखने के लिए किया जाता है। मोरान पारंपरिक आवास के सामाग्री को उनके गांव से संग्रहालय लाकर और असम राज्य के तिनसुखिया जिले के गांव से मोरान जनजातीय कलाकारों को आंमत्रित कर इस पारंपरिक आवास का निर्माण कर अपने सांस्कृतिक समानों के प्रार्दशों का प्रदर्शन किया है। यह मोरान आवास एक प्रदर्शनी के रूप में आंगतुकों के अवलोकन के लिए आज से खोली गई।