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पन्ना में मिला अति कुपोषित बच्चा, उम्र एक साल 10 माह, वजन छह किलो

स्थानीय प्रशासन में मचा हड़कंप

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भोपाल. बैरसिया के बाद पन्ना जिले में अति कुपोषित बच्चा मिला है। बच्चे का नाम आकाश है और उसकी उम्र एक साल 10 महीने है। उसका वजन सिर्फ छह किलो है। गंभीर कुपोषित बच्चा मिलने से स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों को लिखकर दे दिया कि बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित है और उसके माता-पिता एनआरसी में बच्चे को भर्ती करने के लिए राजी नहीं हैं। आगे की स्थिति के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर उसके परिजनों को समझाया और पन्ना के एनआरसी में भर्ती कराया।
बच्चे की मां मायारानी का कहना है कि उसको अधिकारियों पर कोई भरोसा नहीं है। एक साल पहले भी एनआरसी में भर्ती कराया था, लेकिन उसके 1400 रुपए आज तक नहीं मिले। उसके बाद भी बच्चे को न कोई देखने आया और न ही उसकी किसी ने चिंता की। बच्चे के पिता प्रकाश का कहना है कि गंभीर कुपोषित होने के बाद भी उसके पोषण की व्यवस्था किसी ने नहीं की। कुपोषण के लिए काम कर रहे यूसुफ बेग ने कहा कि पन्ना जिले के कटेहरी बिलहटा गांव का ये बच्चा है और इस गांव में न कोई आंगनबाड़ी है और न ही महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने कभी यहां झांका है, उनको तो ये भी पता नहीं है कि यहां गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे रहते हैं। प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा कुपोषित बच्चे हैं जबकि एक लाख से ज्यादा गंभीर रूप से कुपोषित हैं।

* ये है सरकारी योजनाओं की हकीकत
- कुपोषित बच्चे को एनआरसी में भर्ती कराया जाता है, जिसका भत्ता मिलता है लेकिन बच्चे के परिजनों को भत्ता नहीं मिल रहा जिसके कारण लोग अपने कुपोषित बच्चों को भर्ती नहीं कराते।
- न्यूनतम मजदूरी 205 रुपए दिन है जबकि एनआरसी में ये 100-120 रुपए रोज मिलता है।
- एनआरसी में भर्ती के बाद सरकारी कर्मचारियों को चार बार बच्चे को फॉलोअप चैकअप के लिए बुलाना चाहिए ताकि उसकी सेहत की जानकारी ली जा सके लेकिन ऐसा भी नहीं हो रहा।
- परिवार के रोजगार और उनके पुनर्वास की चिंता भी नहीं की जाती जिससे कुपोषण कम होने की जगह बढ़ता जा रहा है।
- कांग्रेस के आदिवासी विधायक ने मांगा पोषण
कांग्रेस विधायक फुंदेलाल मार्को ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को चि_ी लिखी है, जिसमें कहा है कि पिछली सरकार के समय से कुपोषण के लिए आदिवासियों को एक हजार रुपए दिए जाने की योजना चल रही है, लेकिन वे पैसे आज तक किसी को नहीं मिले हैं। सरकार उन एक हजार को 1500 रुपए कर रही है। मार्को ने कहा कि इन 1500 रुपए की जगह परिवार को इतने मूल्य की पोषण आहार की किट दी जाए, ताकि बच्चे को कुपोषण से बाहर निकाला जा सके।

भाजपा ने 15 साल में कुछ नहीं किया, इसलिए ये स्थिति है। व्यवस्थाएं ठीक कर रहे हैं, अब ये हालात देखने को नहीं मिलेंगे।
- इमरती देवी, मंत्री, महिला एवं बाल विकास

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