
भोपाल। फिल्म शोले में सूरमा भोपाल के किरदार से दुनियाभर में अपनी पहचान बनाने वाले फिल्म अभिनेता जगदीप का बुधवार रात को निधन हो गया। मध्यप्रदेश के दतिया में 29 मार्च 1939 को जन्मे जगदीप का असली नाम सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी है।
81 वर्षीय जगदीप काफी समय से बीमार चल रहे थे। जगदीप जाफरी के अंतिम दर्शन के लिए उनके बेटे जावेद जाफरी भी मुंबई पहुंच गए हैं। रमेश सिप्पी की फिल्म शोले में उनका डायलाग मेरा नाम सूरमा भोपाली ऐसे ही नहीं है आज भी लोगों की जुबां पर है।
जगदीप के पिता बैरिस्टर थे। 1947 में बंटवारा के वक्त उनके पिता गुजर गए थे। उनका परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो गया था। मां जगदीप और बाकी बच्चों को लेकर मुम्बई पहुंच गईं। घर चलाने के लिए एक अनाथ आश्रम में खाना बनाने लगी। जगदीप मां को रोता देख। जगदीप ने स्कूल छोड़ दिया और पतंग, साबुन और कंघी बेचने लगे। एक साक्षात्कार में जगदीप ने अपने संघर्ष का जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि मुझे जिंदा रहने के लिए कुछ करना था, लेकिन मैं कोई गलत काम करके रुपया नहीं कमाना चाहता था, इसलिए सड़क पर सामान बेचने लगा।
जब भड़क गए थे असली सूरमा भोपाली
फिल्म शोले के सूरमा भोपाल यानी अभिनेता जगदीप को आज और बीते कल की पीढ़ी ताउम्र नहीं भुला पाएगी, पर असली सूरमा भोपाली नाहर सिंह बघेल को ये दोनों ही पीढ़ियां कभी नहीं जान पाएंगी। नाहर सिंह ही वो असली सूरमा भोपाली हैं जिन पर यह किरदार निभाया गया था। नाहर सिंह फारेस्ट में नौकरी करते थे। 14 नवंबर 1979 को भोपाल के भदभदा से लौटते वक्त एक ट्रैक्टर से उनका स्कूटर टकरा गया था, जिससे असली दुनिया का सूरमा भोपाली हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा हो गया था।
दोस्तों ने दिया था उन्हें ये नाम
पुराने भोपाल में बने सैफिया कॉलेज में पढ़ाई करने वाले ये असली सूरमा भोपाली थे नाहर सिंह बघेल, जिन्हें लोग काले मामा भी कहते थे। उन दिनों नाहर के दोस्त रहे मो. अली बताते हैं कि भोपाल नगर निगम में नाकेदार रहे नाहर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे न केवल गाने के शौकीन थे, बल्कि झगड़ालू भी बहुत थे। उनकी नाक पर हमेशा गुस्सा रहता था और आंखों में पतला सा सूरमा। इसलिए दोस्त उन्हें सूरमा भोपाल कहने लगे।
जावेद अख्तर को भेजा था नोटिस
बताते हैं कि जब फिल्म शोले रिलीज हुई तो अपने नाम का किरदार फिल्म में देखकर नाहर काफी नाराज हुए थे। नाहर का कहना था कि जगदीप का किरदार मुझसे प्रेरित है। उन्होंने फिल्म के लेखक जावेद अख्तर को इस बावत मानहानि का लीगल नोटिस भी भेजा था, हालांकि बाद में पिता दरबार सिंह के समझाने पर उन्होंने केस आगे नहीं बढ़ाया।
Published on:
09 Jul 2020 01:02 pm
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