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विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन अकादमिक और अनुसंधान की गुणवत्ता पर हो

भारतीय विवि संघ के सेंट्रल जोन की दो दिवसीय वाइस चांसलर मीट का समापन

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vice chancellor meet

विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन अकादमिक और अनुसंधान की गुणवत्ता पर हो

भोपाल. नैक की रैकिंग और रेटिंग में रेटिंग महत्वपूर्ण है जो वैश्विक होती है। जिसका सीधा संबंध विश्वविद्यालय या संस्थानों की गुणवत्ता से होता है। जबकि रेटिंग बाजार से भी प्रभावित होती है। यह बात रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय संघ के सेंट्रल जोन की दो दिवसीय वाईस चांसलर मीट के समापन भारतीय विवि संघ के अध्यक्ष प्रो. संदीप संचेती ने कही।

इसके पहले रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय विवि के कुलपति प्रो. एके ग्वाल ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि यह विवि के लिए गौरव की बात है कि इस दो दिवसीय वाईस चांसलर मीट का सफ लतापूर्वक आयोजन किया गया। निश्चित ही इस मीट के मंथन से सारगर्भित अनुसंशाएं निकलेंगी। इन्हें भारतीय विश्वविद्यालय संघ के वार्षिक सामान्य सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में दो दिवसीय मीट की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।

वहीं इससे पूर्व तकनीकी सत्र क्वालिटी एश्योरेंस फ ार एक्सीलेंस एण्ड रेटिंग ऑफ हायर एज्युकेशन विषय पर आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल वी के शर्मा, कुलपति अमेठी विवि ग्वालियर ने की। इसमें पीएस तेलुगू यूनिवर्सिटी हैदराबाद के कुलपति प्रो. एसवी सत्यनारायणा और आरकेडीएफ. विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. वीके सेठी ने अपना प्रेजेंटेशन दिया। कार्यक्रम के अंत में भारतीय विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त सचिव डॉ. आलोक मिश्रा ने सभी का आभार प्रदर्शन किया।

निम्न अनुसंशाएं सामने आईं।

-- विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन अकादमिक व अनुसंधान की गुणवत्ता पर आधारित होना चाहिए।
-- विश्वविद्यालयों को मल्टी डिसिप्लिनरी होना चाहिए।

-- एक्रिडेशन के समय सभी प्रकार के विश्वविद्यालयों को एक ही पैमाने पर नहीं तौला जाना चाहिए।
-- विश्वविद्यालयों को अपनी बेस्ट प्रैक्टिस को आपस में साझा करना चाहिए।

-- विवि के टीचर्स के लिए भी कैडर बनना चाहिए।

-- यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री इंटरफेस होना चाहि। अधिक से अधिक उद्योगों को विश्वविद्यालयों से जुडऩा चाहिए।

-- निजी विवि को भी अनुसंधान के लिये रिसर्च ग्रांट देने की प्रक्रिया को सरल करना चाहिए।