वराह अवतार लेकर पृथ्वी का उद्धार करने वाली इस कथा को उत्कीर्ण करने के लिए शिल्पी ने न सिर्फ विष्णु के नरवराह रूप को भव्यता से तराशा, बल्कि कथा पूरी करने के लिए मगर पर सवार गंगा, कछुए पर सवार यमुना के स्वरूप बनाए हैं। चरणों में शेषनाग, सामने हाथ जोड़े राजा और समुद्र की लहरों का दृश्य कथा को हकीकत से जोड़ता है। भगवान द्वारा पृथ्वी का उद्धार किया तो देव-मुनि-गंधर्व किस तरह प्रसन्न होकर उनकी जयजयकार करने लगे, इसे भी ब्र?हा, शिव, सरस्वती, पार्वती और तमाम देवी-देवताओं के साथ बारीकी से उकेरा गया है। एक ही शिला पर यह सब देखना ऐसा प्रतीत होता है जैसे कलाकार ने पत्थर की चट्टान पर नहीं बल्कि कैनवास पर इस दृश्य को उकेरा हो।