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परीक्षा के बीच बच्चों पर वायरल का अटैक, अस्पताल में वार्ड हाउसफुल

बच्चों की परीक्षा का दौर शुरू हो गया हैं लेकिन मौसम में हुए अचानक बदलाव की वजह से बच्चे वायरल की चपेट में आ रहे हैं। मौसम के बदले मिजाज के कारण बच्चों में बुखार, खांसी, उल्टी-दस्त, निमोनिया जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ रही है।

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बच्चे को देखते हुए डॉक्टर,बच्चा वार्ड में भी हाउसफुल की स्थिति

doctor looking at baby,Housefull condition in child ward

बैतूल. बच्चों की परीक्षा का दौर शुरू हो गया हैं लेकिन मौसम में हुए अचानक बदलाव की वजह से बच्चे वायरल की चपेट में आ रहे हैं। मौसम के बदले मिजाज के कारण बच्चों में बुखार, खांसी, उल्टी-दस्त, निमोनिया जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन आधा सैकड़ा से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं बच्चा वार्ड की बात करें तो यहां क्षमता से अधिक बच्चों को इलाज के लिए भर्ती किया गया है। निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में बच्चों के खानपान पर विशेष सर्तकता बरतना जरूरी है।

बच्चा वार्ड की क्षमता 30 बेड भर्ती 45
बच्चों की बीमारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में कुल बेड की संख्या 30 हैं, लेकिन यहां भर्ती बच्चों की संख्या 45 बताई जाती है। जिस तरह से ओपीडी में बड़ी संख्या में बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं उस वजह से रोजाना भर्ती बच्चों की संख्या भी बढ़ रही है। इसी प्रकार आईसीयू में कुल बेड क्षमता 10 हैं। वर्तमान में आईसीयू के सभी बेड भरे होना बताए जाते हैं।

छह दिन में 432 बच्चे अस्पताल पहुंचे
बीते छह दिनों में जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले बच्चों की संख्या 432 बताई जाती है। बताया गया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या प्रतिदिन 70 से 80 के लगभग है। शुक्रवार दोपहर तक ओपीडी में 46 बच्चे इलाज के लिए पहुंचे थे। जिला अस्पताल की ओपीडी में बच्चों के सिर्फ एक डॉक्टर के बैठने के कारण यहां भीड़ बढऩा शुरू हो गई है। जिसकी वजह से अभिभावकों को बच्चों का इलाज कराने के लिए घंटों इंतजार भी करना पड़ रहा है।

सर्दी-खांसी और बुखार से पीडि़त
जिला अस्पताल में आने वाले बच्चों में सबसे ज्यादा संख्या सर्दी-खांसी और बुखार से पीडि़तों की बताई जाती है। चिकित्सकों के मुताबिक बीते एक सप्ताह के दौरान मौसम में जिस तरह से बदलाव हुआ हैं और तेजी से गर्मी बढ़ी हैं उसकी वजह से सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर पड़ा है। बताया गया कि बच्चों को तीन से चार दिन तक बुखार बना रहता है। साथ में सर्दी-खांसी भी हो रही हैं। शरीर पूरा तप जाता है। बुखार उतरने के बाद भी दोबारा आ जाता है। यदि परिवार में अन्य बच्चे हैं तो वह भी वायरल की चपेट में आ रहे हैं। निमोनिया से पीडि़त बच्चों की संख्या बढ़ी है। इस मौसम में जरूरी है कि बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान रखा जाए। बाजार की कोई भी चीज बच्चों को नहीं खिलाएं, सूखा और बासा भोजन न दे। जितना ज्यादा हो बच्चों को पानी पिलाया जाए।

परीक्षा के दौर में वायरल ने जकड़ा
मार्च महीना शुरू होने के कारण बच्चों की परीक्षाओं का दौर भी शुरू हो चुका हैं। ऐसे में मौसम में बदलाव की वजह से वायरल का अटैक होने के कारण बच्चे पढ़ाई में भी ठीक तरह से ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। वहीं बच्चों के बीमार होने से अभिभावक भी काफी चिंता और परेशानी में है। अभिभावक बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। बताया गया कि इस समय तापमान 33 डिग्री से ऊपर चल रहा हैं। जिला अस्पताल में ही बच्चे बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। वहीं निजी अस्पतालों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। निजी चिकित्सकों के मुताबिक प्रतिदिन 50 से 60 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर सर्दी-खांसी, बुखार और उल्टी-दस्त से पीडि़त बच्चे हैं।
इनका कहना
- मौसम में बदलाव के कारण बच्चों में वायरल फीवर तेजी से बढ़ रहा है। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को बाजार का कुछ भी खाने नहीं दे। घर पर ही ताजा भोजन दें। अधिक मात्रा में पानी का उपयोग करें। पैकेटबंद चीजों का उपयोग भी बंद करें, इससे गैसस्टिक होने की संभावना ज्यादा होती है। बीमार पडऩे पर तत्काल डॉक्टर को दिखाए।
-जगदीश घोरे, शिशु रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल बैतूल।

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