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बढ़ रहा है वायरल फीवर व स्वाइन फ्लू का खतरा, वायरस को ऐसे रखें अपने से दूर

वापस आई ठंड ने बढ़ाए वायरस!...

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बढ़ रहा है वायरल फीवर व स्वाइन फ्लू का खतरा, वायरस को ऐसे रखें अपने से दूर

भोपाल। मौसम में आ रहे परिवर्तन के चलते लगातार लोगों का इम्यून सिस्टम प्रभावित हो रहा है यानि प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ रही है। ऐसे में वायरल फीवर,स्वाइन फ्लू dengue ayurveda in hindi सहित कई वायरल बीमारियां लगातार लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है।

जिसके चलते लाख चाहते हुए भी न तो अपने जरूरी काम कर पा रहे हैं। वहीं बीमारी के कारण घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल होता जा रहा है।

आयुर्वेद डॉक्टर राजकुमार का कहना है कि आमतौर पर लोग वायरल फीवर swine flu ayurveda in hindi को आम बुखार समझ कर घर में पड़ी कोई भी दवा खा लेते हैं लेकिन इसे ज्यादा दिनों तक नजरअंदाज सी का रह-रह कर आना वायरल फीवर के शुरुआती लक्षण हैं।

इन लक्षणों को इग्नोर करने पर इसके वायरस viral fever ayurveda in hindi पनपने लगते हैं। इसके बाद सप्ताह भर तक शरीर बुखार की चपेट में घिरा रहता है।

जानिये इनका इलाज...
वायरल होने पर शरीर में थकान का एहसास होता है और बहुत कमजोरी महसूस होती है। तेज़ बुखार होने पर पैरासिटामोल जैसी दवा ही लेनी चाहिए। बुखार के दौरान गला काफी सूखता है, इसलिए ज्य़ादा से ज्य़ादा तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए और खूब पानी पीना चाहिए।

गले में खराश या दर्द हो तो गर्म पानी में नमक डाल कर उससे गरारा करें। सुबह-शाम ऐसा करने पर राहत महसूस होगी। जितना हो सके, आराम करें। इसके अलावा दिन भर हल्का गुनगुना पानी पीते रहें।

ध्यान रखें कि इस दौरान किसी भी एंटीबायोटिक दवा का सेवन न करें क्योंकि एंटीबायोटिक लेने से बुखार पर इसका असर नहीं होता, बल्कि शरीर में थकान और कमजोरी का एहसास ज्य़ादा होने लगता है। तीन दिन से अधिक बुखार रहे तो अपने नजदीकी चिकित्सक से जांच कराएं।

वायरल, डेंगू और चिकनगुनिया की ऐसे करें छुट्टी...:-

आजकल वायरल बुखार घर घर में पसरा हुआ है। बच्चे से लेकर बड़े तक हर कोई इसकी चपेट में आ रहा है। यूं तो इसके लिए डॉक्टर कई अच्छी दवा लिखते हैं लेकिन घरेलू उपचार इस रोग को सही करने में काफी हद तक कारगार हैं। वायरल बुखार, चिकनगुनिया और डेंगू का उपचार मौजूद है लेकिन लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।

: डेंगू में प्लेटलेट्स काउंट बहुत तेजी से कम होने लगते हैं और विशेषज्ञों का कहना है कि पपीते के पत्ते प्लेटलेट्स को बढ़ाने का काम करते हैं। फीवर जैसे लक्षण शरीर में दर्द, कमजोरी, थकान और मितली भी इन पत्तों से दूर हो सकते हैं। आप पपीते के पत्तों को पीसकर या ड्रिंक के रूप में पी सकते हैं, इससे शरीर के टॉक्सिंस बाहर आ जाते हैं।

: ऐसा माना जाता है कि मैथी के पत्तों के सेवन से फीवर कम होता है और यह दर्द निवारक की तरह भी काम करता है। इससे मरीजों को सुकूनभरी नींद आती है। आप चाहें तो इनके पत्तों को पानी में भिगो कर उसे पी सकते हैं और मैथी पावडर को पानी में मिलाकर भी उस पानी को पी सकते हैं। इससे शरीर के टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं।

: इसकी सूखी जड़ों का प्रयोग दवाएं बनाने में किया जाता है। इसमें डेंगू फीवर के लक्षणों को खत्म करने की क्षमता होती है और शरीर से उसके वायरस को निकालने की भी। यह पपीते के पत्तों की तरह कार्य करता है। इसे पपीते के पत्तों की तरह ही प्रयोग कर सकते हैं या तो इसे मसलकर या चबाकर या फिर इसका जूस बनाकर पी सकते हैं।

: मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में हल्दी उपयोगी मानी जाती है और इससे हीलिंग प्रक्रिया तेज हो जाती हैं। इसे दूध के साथ लेना फायदेमंद माना जाता है।

: तुलसी की पत्तियों से तैयार पेय पीएं और उसमें 2 ग्राम काली मिर्च डालें। इससे इम्यूनिटी बेहतर होती है और एंटीबैक्टीरियल तत्व की तरह कार्य करता है।

गिलोय के बारे में आपने कभी न कभी किसी से जरूर सुना होगा। यहां तक कि हमारी मां और दादी तो पुराने बुखार या डेंगू जैसी गंभीर मामले में इसे लेने की सलाह देती है। जी हां गिलोय सबसे प्रभावी आयुर्वेदिक दवाओं में से एक है। यह इतनी गुणकारी होती है कि प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे अमृता के रूप में जाना जाता है, इस बारहमासी जड़ी-बूटी को लगाना और इस्‍तेमाल करना बहुत ही आसान है।

गिलोय को चिकनगुनिया, डेंगू या नॉर्मल सभी तरह के बुखार की रामबाण औषधि माना जाता है।

रसोई की ये 6 चीजें वायरल फीवर को चुटकियों में दूर करें...

अगर आपको अपने अंदर वायरल बुखार के लक्षण दिख रहे हैं तो गीली पट्टी को अपने सिर पर लगाएं। ऐसा तब तक करें तब तक बुखार उतर ना जाए।

सितोपलादी का चूर्ण भी वायरल फीवर में बहुत असरदार है। यह शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और बुखार को छूमंतर करता है।

तुलसी की 10-15 पत्ती को तोड़कर कालीमिर्च के साथ पीसकर खाने से भी बुखार कम होता है। साथ ही उल्टी और पेट दर्द से भी राहत मिलती है।

नींबू, शहद और अदरक के रस के साथ तुलसी के रस को मिलाकर सुबह-शाम लेने से सर्दी-खांसी और बुखार दूर होता है।

त्रिफला चूर्ण में ज्वर नाशक गुण होता है। इससे दस्त भी साफ होता है और बुखार भी कम होता है। इसलिए इसका भी सेवन करें।

खूब पानी पीने से भी वायरल फीवर नियंत्रित होता है। इसके अलावा, नींबू, पुदीना, शहद और अजवाइन आदि भी पानी के साथ मिलाकर लेने से फायदा होता है।

ये जड़ी-बूटी करे वायरल बुखार दूर..

आजकल के बदलते मौसम में वायरल समेत कई बीमारियां बहुत ज्यादा आम हो गई हैं। ऐसे में इनसे बचने के लिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम पहले से ही तैयार रहें। जड़ी-बूटियां न केवल खाने का स्वाद बढ़ाने का काम करते हैं बल्कि इनसे स्वास्थ्य लाभ भी होता है।

1. तुलसी
हर घर में तुलसी का पौधा आवश्यक रूप से उगाया जाता है, धार्मिक के साथ-साथ इसके चिकित्सकीय गुणों के कारण भी लोग इसे अपने घरों में लगाना पसंद करते हैं। यह एंटीआर्थराइटिक, टॉपिकल एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इन्फ्लेमेटरी और कीड़ो-मकोड़ों से प्राकृतिक रूप से बचाव करती है। इनकी पत्तियों को खाने से विटामिन ए, के और सी के साथ-साथ मैग्नीशियम, आयरन, पोटेशियम और कैल्शियम प्राप्त होता है।

2. चिव्स का एक पौधा
यह पौधा हानिकारक कीड़े-मकोड़े और मच्छरों को घर से दूर रखता है। इसमें सल्फर की अत्यधिक मात्रा पाई जाती है। इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण और डाइजेस्टिव गुण पाए जाते हैं। सूप और सब्जियों का स्वाद बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है और सेहत को बेहतर बनाने के लिए भी।

3. गैस्ट्रिक अपसेट
विटामिन सी से भरपूर धनिया पत्ती को आसानी से घर पर उगाया जा सकता है। साथ ही साथ इसमें विटामिन और मिनरल्स भी पाए जाते हैं। ताजगी भरने वाली ये पत्तियां पाचन को बेहतर बनाती हैं और सूजन को कम करती हैं जो कि गैस्ट्रिक अपसेट के कारण पैदा होती है। साबुत धनिया ब्लड शुगर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है और साथ ही लिवर व पैनक्रियाज पर बढ़ते प्रभाव को कम करता है, जिससे इंसुलिन का निर्माण सही तरीके से होता है और साथ ही साथ पाचन क्रिया बेहतर होती है।

4. साइट्रिक
यह पौधा पुदीना के परिवार से संबंधित है। इसे आसानी से घर के गार्डन में या घर के कोने में उगाया जा सकता है। साइट्रिक खुशबू देने के साथ-साथ लेमन बाम सेहत संबंधी कई लाभ पहुंचाता है। लेमन बाम प्राकृतिक तरीके से नर्व्स और मसल्स के दर्द को दूर करता है। इस ताजा हर्ब का प्रयोग पुलटिस के तौर पर सूजन को दूर करने और इन्फेक्शन से बचाव करने में प्रयोग कर सकते हैं। इसके एंटी वायरल गुणों के कारण इस हर्ब को लगाने से कोल्ड का प्रभाव कम होता है।

5. पुदीना
इससे बनी चाय पीने से साइनस की जकड़न दूर होती है, सिरदर्द में आराम मिलता है। पिपरमेंट ऑयल से पाचन क्रिया में लाभ मिलता है, मासिक चक्र के दौरान होने वाले दर्द में राहत मिलती है और आईबीएस के लक्षणों में राहत पहुंचाता है। इसे आप घर के किसी भी हिस्से में उगा सकते हैं।

6. रोजमैरी
पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में रोजमैरी भी एक असरदार हर्ब है। यह सांसों की बदबू दर्द को दूर करने में भी लाभकारी होती है। रोजमैरी ऑयल या फिर इस हर्ब को पानी में मिलाकर इस्तेमाल करने से सिर की रूसी दूर होती है और बाल तेजी से बढ़ते हैं। साथ ही त्वचा की खुजली को भी शांत करने का काम करती है। इसकी खुबशू मस्तिष्क को राहत पहुंचाती है, एंग्जाइटी को शांत करती है और दिनभर के कार्यों से होने वाले तनाव को दूर करती है।

7. अजवाइन
एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ए का बेहतरीन स्रोत है। जोकि आंखों, त्वचा, बालों और नाखूनों की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। यह एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक होता है। कोल्ड, कफ, और खराब गले की स्थिति में अजवाइन के पत्तों को डालकर तैयार की गई चाय काफी राहतभरी होती है।


वायरल फीवर के लक्षण
1. गले में दर्द होना

2. बदन दर्द या मसल्स पेन

3. खांसी आना

4. सिरदर्द या त्वचा में रैशेज होना

5. सर्दी-गर्मी लगना

6. आंखों में जलन

7. थकान महसूस होना

8. तेज़ बुखार।


ये बरतें सावधानी
विटमिन सी का सेवन अधिक करें। यह हमारे इम्यून सिस्टम को सही रखता है।
हल्का खाना ही खाएं.
पत्तेदार सब्जियां, फूलगोभी और अरबी न खाएं.
हल्दी, अजवाइन, अदरक और हींग का अधिक सेवन करें.
ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी पिएं.
रेस्ट करें और बासी खाना न खाएं.
गर्म पानी की भाप लें.
छींकते वक्त मुंह पर रूमाल बांधें.
आराम न हो तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।