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मलयाली नववर्ष Vishu 2018: सुबह से ही मंदिरों में लगा भक्तों का तांता : वीडियो भी देखें

मलयाली नववर्ष Vishu 2018 पर रविवार को सुबह से ही विष्णु मंदिरों में लगी भक्तों की भीड़...

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Vishu 2018

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज यानि रविवार 15 अप्रैल को मलयाली समाज के लोगों ने अपना नव वर्ष विषु मनाया। इस दौरान सुबह के समय कई मंदिरों में भीड़ देखने को मिली।


इस दौरान भोपाल में रह रहे इस समाज के लोगों ने विषु मनाया जिसे मलयालम का न्यू इयर कहा जाता है। इस दिन मलयाली समाज के लोग ने मंदिरों में भगवान विष्णु के दर्शन कर नए साल का पहला दिन शुरू किया।

साथ ही कुछ लोगों ने इस पर्व पर भगवान् श्री कृष्ण को टोकरी में रखकर उसमें फल, फुल सजाएं। इसके बाद भगवान विशु की पूजा की। विशु के दिन मलयाली न्यू इयर विशु भी कहा जाता है।

यह मलयालम महीने मेष की पहली तिथि को मनाया जाता है। विषु सौभाग्य व अच्छी किस्मत के आगमन का प्रतीक माना जाता है।

वहीं इस दिन मलयाली समाज के घरों में घर के बड़े ने कहीं परिवार के सभी सदस्‍यों को तोहफा दिया तो कहीं कुछ घरों में बड़ों ने छोटों को पैसे दिए। केरल में इसे ‘कैनीट्टम’ कहते हैं। यह चलन बिल्‍कुल ईद की तरह है, जिसमें घर के बड़े परिवार के लोगों को ईदी देते हैं।


यह है मान्यता...
यह दिन शादी, नए घर में प्रवेश, नए वाहन की खरीद और नया काम शुरू करने के लिए पवित्र और शुभ माना जाता है।

ये भी है विशेष:
जानकारी के अनुसार विषु केरल का प्राचीन त्योहार है। यह केरलावासियों के लिए नववर्ष का दिन है। यह मलयालम महीने मेष की पहली तिथि को मनाया जाता है।

विषु सौभाग्य व अच्छी किस्मत के आगमन का प्रतीक माना जाता है और इस दिन केरल में सार्वजनिक अवकाश होता है।


ऐसी भी मान्‍यता है कि केरल में इसी दिन से धान की बुआई शुरू हो जाती है। केरल के साथ ही मलयालम में भी इसे नये साल की शुरुआत ही मानते हैं।

इस दिन लोग नया पंचांग पढ़ते हैं और पूरे साल का अपना भविष्‍यफल देखते हैं। इस दिन केरल और मलयालम के हर घर में भगवान श्रीकृष्‍ण की पूजा की जाती है और अच्‍छे फसल की कामना की जाती है।

विषुक्‍कणी का दर्शन...
भोपाल में बसे इसी समाज के पीआर नायर ने बताया कि विषु के दिन का मुख्‍य आकर्षण ‘विषुक्कणी’ है. ‘विषुक्कणी’ झांकी-दर्शन को कहते हैं। त्‍योहार के दिन आंख खोलने के बाद सबसे पहले विषुक्‍कणी का दर्शन किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि विषुक्‍कणी का असर पूरे साल रहता है और इसके दर्शन से जीवन की परेशानियां खत्‍म हो जाती हैं। विषु की पहले शाम को ‘कणी’ दर्शन की सामग्री इकट्ठी करके सजा ली जाती है।

एक कांसे के डेगची या अन्य किसी बर्तन में चावल, नया कपड़ा, ककड़ी, कच्चा आम, पान का पत्ता, सुपारी, कटहल, आइना, अमलतास के फूल आदि सजा कर रख दिए जाते हैं और इसी बर्तन के पास एक दीपक जलाकर रखा जाता है। दीपक लंबा और ऊंचा होता है।

ये बनाए गए व्‍यंजन...
इस दिन घर में सद्य नामक भोज तैयार किया जाता है। जिसे दोपहर में ग्रहण किया जाता है। पकवान प्रायः कद्दू, आम, घिया, करेला, अन्य शाकहारी वस्तुओं और फलों से बनाये जाते हैं। ये सब्भी वस्तुएं इस ऋतु में मिल जाता है।


इस दिन घरों में 'सद्य' नामक भोज तैयार किया जाता है। जिसे दोपहर में ग्रहण किया जाता है। पकवान प्रायः कद्दू, आम, घिया, करेला, अन्य शाकाहारी वस्तुओ और फलों के मिश्रण से बनाए जाते हैं।

विषुक्‍कणी झांकी जब आती है तो उसके दर्शन कराने के लिए घर का सबसे बुजुर्ग व्‍यक्ति एक-एक कर घर के सदस्‍यों को सहारा देकर झांकी के पास ले जाता है और उसके दर्शन कराता है। विषुक्‍कणी का दर्शन करने से पहले घर का कोई भी सदस्‍य अपनी आंखें नहीं खोलता।

परिवार के सभी सदस्‍यों को तोहफा...
विषुक्‍कणी का दर्शन करने के बाद घर के बड़े परिवार के सभी सदस्‍यों को तोहफा देते हैं या कुछ पैसे देते हैं। केरल में इसे ‘कैनीट्टम’ कहते हैं। यह चलन बिल्‍कुल ईद की तरह है, जिसमें घर के बड़े परिवार के लोगों को ईदी देते हैं।

भगवान विष्णु की पूजा :
इस दिन मलयाली लोगों ने मंदिरों में जाकर भगवान विष्णु की पूजा की। जिसके चलते सुबह से ही भोपाल के मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिली।

पटाखों की आतिशबाजी...
केरल की तरह ही भोपाल में भी कुछ मलयाली समाज के लोगों ने विषु के दिन पटाखों की आतिशबाजी कर जश्न मनाया।

अपनों को भेजे ऐसे-ऐसे संदेश :
- भुला दो बीता हुआ कल दिल में बसाओ आने वाला कल हंसो और हंसाओ, चाहे जो भी हो पल खुशियां लेकर आएगा आने वाला कल आपका नववर्ष मंगलमय हो.- हैप्पी विषु

- पुराना साल सबसे हो रहा है दूर, क्या करें ये ही है कुदरत का दस्तूर, बीती यादें सोचकर उदास न हो तुम, विषु के जश्न में धूम मचाओ तुम- विषु पर्व की शुभकामनाएं

- नए साल में गुलाब ढेरों खिलाने हैं, नए साल में गुलाब ढेरों खिलाने हैं, रोते हुए दोस्त सारे मनाने हैं, बंद आंखों में जो चुभ रहे हैं रेत की तरह, बंद आंखों में जो चुभ रहे हैं रेत की तरह, पलको को खोलके आंसू सारे गिराने है- आपको मुबारक विषु का त्योहार

- 12 महीने आती रहे कामयाबी, 52 सप्‍ताह बनी रहे मुस्‍कान, 365 दिन होती रहे मस्‍ती, 8760 घंटे बनी रहे खुशी, 525600 मिनट बरसे भगवान की कृपा, और 31536000 सेकंड में एक पल भी न आए गम- हैप्पी विषु

विशु का अर्थ मलयालम में न्यू इयर यानि नया साल होता है। विशु केरल का प्रसिद्ध त्योहार है। यह मलयालम महीने 'मेदम' के पहले दिन मनाया जाता है।

मलयालम नववर्ष विशु को केरल और कर्नाटक सहित अन्य भागों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग मंदिरों में भगवान विष्णु के दर्शन कर नए साल का पहला दिन शुरू करते हैं।