
फाइल फोटो: 17 दिसंबर को बालाघाट में वोटिंग करने के लिए लगी लाइन।
मध्यप्रदेश में मतदान के बाद सारे गुणा—भाग ट्रेंड पर टिके हैं, लेकिन इस बार प्रदेश में जिस तरह की वोटिंग हुई है, उससे हार—जीत के समीकरण निकालना राजनीतिक पंडितों के लिए आसान नहीं है। दोपहर तक भाजपा की सरकार बन रही होती है, तो शाम होते—होते आंकड़े कांग्रेस के पक्ष में जाने लगते हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो नतीजे का पूर्वानुमान टेढ़ी खीर है।
इस तरह के वोटिंग ट्रेंड से फंस जाता है चुनाव
यदि वर्ष 2023 और 2018 के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में हुए मतदान का आंकलन करें तो भी स्थिति बहुत ज्यादा स्पष्ट नजर नहीं आती। मध्यप्रदेश में वर्ष 2023 में ग्रामीण क्षेत्र की 160 विधानसभा सीटों पर औसतन रूप से करीब 78 फीसदी वोट पड़े हैं, जबकि 2018 में अंचल में करीब 77 फीसदी मतदान हुआ था। अब यहां एक फीसदी जो मतदान ज्यादा नजर आ रहा है, वह वोटर्स की संख्या बढ़ने और जागरुकता का परिणाम है। इससे नतीजे बहुत ज्यादा प्रभावित होने का अनुमान नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के वोटिंग ट्रेंड से चुनाव फंस जाता है। ऐसे में प्रत्याशियों की हार—जीत का अंतर भी बहुत ज्यादा नहीं रहता।
चौंकाते हैं शहरी क्षेत्र के आंकड़े
शहरी क्षेत्र के आंकड़े और चौंकाते हैं। इस बार शहरी क्षेत्र की 70 सीटों पर औसतन 71 प्रतिशत वोटिंग हुई है। इसमें भी ग्वालियर पूर्व, भिण्ड, भोपाल दक्षिण पश्चिम, भोपाल मध्य एवं गोविंदपुरा सीट पर मतदान काफी कम हुआ है, जबकि ये पूर्णत: शहरी इलाके हैं। वहीं, शहरी क्षेत्र की इन 70 सीटों पर 2018 में 72 प्रतिशत मतदान हुआ था। यानी कम से कम एक प्रतिशत की गिरावट आई है।
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वर्ष 2023 का वोटिंग ट्रेंड एक नजर
ग्रामीण क्षेत्र की टॉप—5 सीटें
सीट मतदान
सैलाना 90.10
अमरवाड़ा 88.63
केवलारी 88.59
बरघाट 88.31
चौरई 87.88
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ग्रामीण क्षेत्र की बॉटम—5 सीटें
जोबट 54.37
अंबाह 60.50
गोहद 61.52
मनगवां 62.36
देवतालाब 63.30
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शहरी क्षेत्र की टॉप—5 सीटें
रतलाम ग्रामीण 86.20
जौरा 85.52
शाजापुर 85.01
शुजालपुर 84.70
सिवनी 84.02
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शहरी क्षेत्र की बॉटम—5 सीटें
ग्वालियर पूर्व 57.94
भिण्ड 58.56
भोपाल दक्षिण पश्चिम 59.11
भोपाल मध्य 60.54
गोविंदपुरा 63.03
(मतदान के सभी आंकड़े प्रतिशत में)
Published on:
29 Nov 2023 09:15 pm
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