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भानपुर खंती के करीब भूजल हुआ दूषित, पीने लायक नहीं बचा पानी

नगर निगम भानपुर खंती के साइंटिफिक क्लोजर का दावा भले ही करे, लेकिन यहां ऊपर से कचरा हटाते हैं, जबकि नीचे का तरल लीचेट भरा हुआ है। अब भी इसका 50 प्रतिशत काम होना है।

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भानपुर खंती के करीब भूजल हुआ दूषित, पीने लायक नहीं बचा पानी

भानपुर खंती के करीब भूजल हुआ दूषित, पीने लायक नहीं बचा पानी

भोपाल. नगर निगम भानपुर खंती के साइंटिफिक क्लोजर का दावा भले ही करे, लेकिन यहां ऊपर से कचरा हटाते हैं, जबकि नीचे का तरल लीचेट भरा हुआ है। अब भी इसका 50 प्रतिशत काम होना है। इसमें तमाम प्रदूषक तत्व मौजूद हैं, जिससे करीब के क्षेत्रों में भूजल पीने लायक नहीं रहा। ये खुलासा एनजीटी के निर्देश पर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा खंती के आसपास के जलस्रोतों के पानी की जांच में हुआ है। पीसीबी ने कई खतरनाक प्रदूषकों की जांच नहीं की है, जो बेहद खतरनाक हैं। एनजीटी ने इस मामले को स्वत: संज्ञान लेकर खोला है और एमपीपीसीबी से रिपोर्ट मांगी थी। एनजीटी ने 15 नवंबर 2016 को निर्देश दिए थे कि जब तक साइट बंद नहीं होती, हर महीने पीसीबी, पीएचई और सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड यहां की मॉनीटरिंग रिपोर्ट देंगे, पर पीसीबी ने ही कुछ रिपोर्ट दी। सोमवार को इस मामले की सुनवाई होगी। एमपीपीसीबी की रिपोर्ट में बताया गया है कि भानपुर खंती के डेढ़ किमी क्षेत्र में खेजड़ा बरामद, रासलाखेड़ी, भानपुर, मोहाली गांवों के छह हैंडपंप व ट्यूबवेल के सैंपल की जांच हुई। पांच जलस्रोत का पानी सीधे पीने लायक नहीं मिला है। कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की संख्या प्रति लीटर पानी में 100 से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन 1600 तक मिली। यह बैक्टीरिया गंदगी में ही पनपते हैं। वायु गुणवत्ता की स्थिति भी भानपुर खंती के पास ठीक नहीं मिली। यहां पीएम-10 की संख्या मानकों से ज्यादा मिली है। हालांकि आसपास के गांवों में स्थिति ठीक पाई गई। एमपीपीसीबी ने अपनी यह रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी है।

खतरनाक तत्वों की नहीं हुई जांच
एमपीपीसीबी ने जांच में भी केवल क्लोराइड, सल्फेट, नाइट्रेट, हार्डनेस, पीएच आदि की जांच की, जबकि खंती के लिहाज से जरूरी जांचें नहीं हुईं। यहां पानी में ऑक्सीजन, बीओडी, सीओडी, हैवी मेटल्स की जांच होनी चाहिए। तभी पता चलता कि भूजल में जहरीले तत्व मौजूद हैं या नहीं।
इधर आदमपुर में दूर-दूर तक फैला प्लास्टिक कचरा, जैविक खाद में प्लास्टिक के टुकड़े
आदमपुर छावनी में साइंटिफिक लैंडफिल साइट 2017 में पूरी तरह बन जाने का लिखित दावा नगर निगम ने अक्टूबर 2016 में एनजीटी को किया था। इसके पांच साल बाद मौके पर जो हालात हैं वह चौंकाने वाले हैं। ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निष्पादन के नाम पर जो गतिविधियां चल रही हैं, उसके चलते पूरे इलाके का पर्यावरण खतरे में आ गया है। पर्यावरणविद डॉ सुभाष सी पांडे ने एनजीटी को आदमपुर की स्टेटस रिपोर्ट देने के लिए शनिवार को साइट का निरीक्षण किया। सुभाष सी पांडे ने बताया कि, नगरीय ठोस अपशिष्ट नियम 2016 के अनुसार जब किसी भी लैंड फिल साइट का निर्माण किया जाता है , उससे पहले आधा किलोमीटर तक बफर जोन बनाना अनिवार्य है जिसमें सघन पौधरोपण होना चाहिए। लेकिन साइट पर ऐसा कुछ नजर नहीं आया। यहां कचरे के ढेर पर शीट भी नहीं ढंकी गई है जिसके चलते कचरा और पॉलीथिन दूर-दूर तक फैल चुके हैं और जमीन, जल आदि को प्रदूषित कर रहे हैं।

अधिकारी नहीं दे सके जवाब
न गर निगम की ओर से तय की गई कम्पनी ग्रीन रिसोर्स सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की ओर से ठोस गीले कचरे से खाद बनाना बताया जा रहा है। खाद बोरियों रखी भी मिली, लेकिन बारीकी से देखने पर इसमें प्लस्टिक के टुकड़े नजर आए। कम्पनी के अधिकारियों ने बताया कि, गीले और सूखे कचरे को अलग करके खाद बनाई जा रही है। कम्पनी के अधिकारियों ने बताया कि, इस खाद को नर्सरियों और वन विभाग को बेचने की तैयारी है, लेकिन जब पांडे ने जब इस खाद की टेस्टिंग रिपोर्ट मांगी और इसमें हैवी मेटल्स होने या ना होने की पूछताछ की तो अधिकारी जवाब नहीं दे सके।