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शाबास बेटी! विदेश में लाखों का पैकज छोड़ देश महिलाओं को बना रहीं सशक्त

- महिला बाल विकास, पंचायत विभाग और पर्यटन विभाग के साथ मिलकर कर रही काम - पहले माता- पिता थोड़ा नाराज हुए लेकिन बाद में बेटी के जुनून के सामने झुके

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भोपाल@रूपेश मिश्रा

हर माता- पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे अच्छी जगह से शिक्षा हासिल कर खूब पैसे कमाएं। लिहाजा इसी सोच के साथ भोपाल की सृष्टी प्रगट के माता- पिता ने भी अपनी बेटी को लंदन पढ़ाने के लिए भेजा। तब सृष्टी के मन में भी पढ़ाई के बाद अच्छी नौकरी करने का ख्याल था। लेकिन जब उन्होंने लंदन में अपनी पढ़ाई पूरी कर ली। तब उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि इतनी पढ़ाई पढ़ने के बाद मैं विदेश की धरती में क्यों रहूं। मैंने जो पढ़ाई की है उसका लाभ मेरे देश, मेरे शहर और मेरे गांव के लोगों को मिलना चाहिए। इसी ख्याल को लिए सृष्टी भोपाल वापस लौट आईं। और यहां महिला और बच्चों के अधिकारों के लिए कार्य करने लगी। शुरूआत मध्यप्रदेश से की लेकिन अब देशभर में कई सरकारी विभागों के साथ मिलकर भी काम कर रही हैं। पहले माता- पिता ने ज्यादा सहयोग नहीं किया। लेकिन बाद में बेटी का जुनून देखकर वो भी बेटी के फैसले के साथ खड़े हो गए।

गांव की महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाना लक्ष्य

सृष्टी ने बताया कि उनकी टीम में 12 से 15 ऐसे लोग हैं जो लगातार काम करते रहते हैं। और जब कोई विशेष प्रोग्राम चलता है तब लोगों की संख्या बढ़ती रहती है। विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण, उनके अधिकार, घरेलू हिंसा और बाल अधिकारों पर काम करती हैं। साथ ही सरकार की वो योजनाएं जो महिलाओं के लिए हैं लेकिन जानकारी के अभाव में गांव की महिलाएं उन योजनाओं के लाभ से महरूम हैं ऐसी महिलाओं को जागरूक कर सरकारी योजनाओं से जोड़ती हैं।

कई सरकारी विभागों के साथ कर रहीं काम

सृष्टी अपनी टीम के साथ कई सरकारी विभागों के साथ भी काम कर रही हैं। जैसे महिला बाल विकास के साथ महिला अधिकारों के लिए। पंचायत विभाग के साथ सतत विकास लक्ष्य पर स्टेट एक्शन प्लान बनाने पर कार्य करना कि कैसे पंचायत स्तर पर सतत विकास लक्ष्य का क्रियान्वयन करना। साथ ही पर्यटन मंत्रालय के साथ युवाओं को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देने का कार्य कर रही हैं।