
MP News : पत्नी, एक बेटा और तीन बेटियां...भरा-पूरा परिवार, फिर भी 58 साल के निरंजन यादव भिखारियों का जीवन जीने को विवश हैं। परिवार 113 किमी दूर गंजबासौदा में चैन की जिंदगी बसर कर रहा है। लेकिन बच्चों की उदासीनता ऐसी कि जिस पिता की छाया में वे बड़े हुए, वही पिता 10 साल से राजधानी भोपाल के अशोका गार्डन क्षेत्र के फुटपाथ पर रह रहे हैं। सामाजिक संगठनों ने घरवालों से सपंर्क किया तो बेटा भोपाल पहुंचा, लेकिन पिता को लिए बिना ही लौट गया। भिखारी मुक्त अभियान में प्रशासन ने सामाजिक संगठनों के साथ भिखारियों को चिह्नित करना शुरू किया तो निरंजन की दर्दभरी कहानी सामने आई।
निरंजन को अपने गांव, तहसील और जिले की पूरी जानकारी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने टी-स्टॉल वाले की मदद से मोबाइल पर वीडियो कॉल कर बेटे से बात कराई तो निरंजन फफक पड़े। बोले-मुझे घर ले चलो। लेकिन बेटा लौटकर नहीं आया। विदिशा एसपी के निर्देश अंबानगर चौकी प्रभारी ने निरंजन के घर ही पड़ताल कराई। दावा है, जल्द निरंजन को घर भेजा जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निरंजन के परिवार से संपर्क किया। परिवार ने कहा, वे करीब 10-11 साल पहले ही घर छोड़कर गए थे। घरवालों को पता है कि निरंजन भोपाल में हैं। लेकिन किसी की रुचि उन्हें घर लाने में नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सोनी ने बताया, संबंधित थाने की पुलिस उनके घर गई। दबाव में बेटा रितिक यादव भोपाल भी आया, लेकिन पिता को नहीं ले गया। बेटा अब फोन पर भी बात टाल रहा है। कई बार गलत नंबर बताकर कॉल काट रहा है।
Updated on:
26 Mar 2025 08:40 am
Published on:
26 Mar 2025 08:39 am

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