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भक्ति के साथ मिलती है राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा

नेहरू नगर का साईंधाम मंदिर: यहां विराजमान हैं देवी-देवताओं और शहीदों की 51 प्रतिमाएं

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भक्ति के साथ मिलती है राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा

भक्ति के साथ मिलती है राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा

भोपाल. मंदिर हमारे लिए आस्था के केंद्र होते हैं। यूं तो मंदिरों में विभिन्न देवी देवताओं की प्रतिमाएं होती हैं, जहां श्रद्धालु पूजा अर्चना करते हैं। लेकिन राजधानी के नेहरू नगर स्थित साईधाम मंदिर अपने आप में अनूठा है। यहां आने वाले भक्तों को प्रभु की भक्ति के साथ राष्ट्रभक्ति की भी प्रेरणा मिलती है। दरअसल इस मंदिर में विभिन्न देवी-देवताओं के साथ-साथ भारत माता मंदिर, स्वतंत्रता संग्राम के कई शहीदों की मूर्तियां, विभिन्न समाजों के आराध्य देवों की मूर्तियां
स्थापित हैं। इस मंदिर की स्थापना 1994 में हुई थी।

साईकृपा सेवा समिति और न्यास के अध्यक्ष प्रभात सोनी ने बताया कि मंदिर के संस्थापक नाथूराम सोनी इस जगह पर दुकान लगताते थे। स्वयं के खरीदे हुए प्लाट पर उन्होंने साईंबाबा का छोटा सा मंदिर बनाया। जब यहां भागवत कथा कराई तो शंकराचार्य स्वामी हरे आचार्य महाराज ने उन्हें संत मंगलम की उपाधि दी। यहां 4 हजार वर्गफीट प्लाट में से 3 हजार वर्गफीट प्लाट पर मंदिर बनाने की योजना बनाई। इसके बाद इसे मूर्त रूप देते हुए भगवान गणेश, श्रीराम दरबार, राधा कृष्ण, 12 ज्योर्तिलिंग, शिव परिवार, मां दुर्गा, मां काली, लक्ष्मी, सरस्वती, गायत्री देवी, वैष्णो देवी, हनुमानजी, शनि महाराज की प्रतिमाएं स्थापित कीं।

भारत माता एवं समाजों के आराध्य देव
संस्था के सचिव प्रमोद नेमा ने बताया कि मंदिर के पीछे खाली पड़ी जगह में संत मंगलम ने भारत माता का मंदिर बनाया। इसके साथ ही बड़े भाई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबूलाल सोनी से प्रेरणा लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले शहीदों की प्रतिमाएं भी यहां स्थापित कीं। यहां अग्रवाल समाज के आराध्य देव अग्रसेन महाराज, संत रविदास, जैन समाज के महावीर स्वामी, ब्राह्मण समाज के परशुराम, सेन समाज के सेन महाराज, ठाकुर समाज की किलन देवी, कायस्थ समाज के भगवान चित्रगुप्त, संत कबीर दास सहित अन्य समाजों के आराध्यो की मूर्तियां भी यहां स्थापित की गई है।

सभी धर्म ग्रंथों का समावेश
न्यास के उपाध्यक्ष प्रदीप सोनी मिलन ने बताया कि मंदिर में चारों वेद, 8 पुराण, गीता , रामचरितमानस, बाइबल, कुरान शरीफ सहित अन्य धर्म ग्रंथ भी आम लोगों के अध्ययन हेतु यहां पर रखे गए हैं। संत मंगलम ने अपना उत्तराधिकारी अपने ज्येष्ठ पुत्र प्रभात सोनी को बनाया है, लेकिन वर्तमान में उनकी पत्नी कृष्णा देवी सोनी पूरे मंदिर की देखरेख एवं व्यवस्था करती हैं।