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सिर की हड्डी को पेट में रख, ऑपरेशन के लिए चक्कर काट रही महिला, अस्पताल में नहीं है जरूरी सामान

दुर्घटना में महिला के सिर में सूजन आई तो हड्डी काटकर पेट में रखी, सालभर से नहीं हो पा रहा ऑपरेशन,क्योंकि नहीं है टाइटेनियम प्लेट

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सिर की हड्डी को पेट में रख, ऑपरेशन के लिए चक्कर काट रही महिला, अस्पताल में नहीं है जरूरी सामान

भोपाल. 40 साल की महिला अपने सिर की हड्डी को पेट में रख कर एक साल से ऑपरेशन के लिए हमीदिया अस्पताल के चक्कर लगा रही है। वह डॉक्टरों से गुहार लगा रही है कि हड्डी वापस अपनी जगह लगा दें, लेकिन अस्पताल में ऑपरेशन के लिए जरूरी सामान नहीं है। ऑपरेशन ना होने से महिला चलने-फिरने से भी मोहताज है।

विदिशा के नटेरन की गीताबाई सेन बाइक से गिर गई थीं। हमीदिया के सर्जरी विभाग मेें जांच हुई। पाया कि गीताबाई के सिर में खून जमा है और सूजन है। सूजन बढऩे से दिमाग फैल रहा था, ऐसे में पर्याप्त जगह देने के लिए ऑपरेशन कर सिर के ऊपरी हिस्से की हड्डी काटने का फैसला किया। तय किया गया कि छह माह बाद पुन: ऑपरेशन कर हड्डी को सिर में जोड़ दिया जाएगा।

छह माह से अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं

हम मां के ऑपरेशन के लिए छह महीने से अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। अस्पताल में कहते हैं कि सामान नहीं है... इंदौर या जबलपुर ले जाओ। मां के बीमार होने कारण पापा भी काम पर नहीं जाते। मैं ही मजदूरी कर जैसे-तैसे घर चला रहा हूं। - विकास सेन, पीडि़ता का बेटा

संक्रमण से बचाने पेट में ही रख दी हड्डी

न्यूरो सर्जन का कहना है कि हड्डी को छह माह तक सुरक्षित कैसे रखते। इसे ऑटोक्लेव कर लैब में रख लिया जाता है, लेकिन खराब होने की आशंका रहती है। ऐसे में हड्डी को महिला के शरीर में ही रखने का निर्णय लिया गया।

दो बार भेजा मांग पत्र

सर्जरी विभाग का कहना है कि आयुष्मान योजना के तहत दो बार ऑपरेशन के लिए सामान की लिस्ट अधीक्षक के पास भेज चुके हैं। हर बार टेंडर ना होने के कारण सामान नहीं मिल पा रहा। योजना के मरीज से बाजार से सामान भी नहीं मंगवा सकते।

टाइटेनियम की प्लेट लगना है मरीज को

ऑपरेशन के लिए टाइटेनियम प्लेट की जरूरत है। ऑपरेशन में महिला के सिर की हड्डी काम नहीं करती है तो उसकी जगह तुरंत टाइटेनियम प्लेट की बनी हड्डी लगा दी जाएगी।

तब शरीर स्वीकार कर लेता है अंग

न्यूरो सर्जन डॉ. एके चौरसिया के मुताबिक महिला के सिर की हड्डी पेट की स्किन के नीेचे रखा है। इससे दोबारा इन अंगों को जोडऩे पर शरीर उसे बिना किसी दिक्कत के स्वीकार कर लेता है। मशीन में ऑटोक्लेव करने पर शरीर कई बार अंग को बाहरी मानकर स्वीकार नहीं करता और दिक्कत बढ़ जाती है।