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भोपाल. आज के समय में बदलते खान-पान, लाइफस्टाइल व नशे की आदत के चलते कपल्स में गर्भधारण की समस्या बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि इस समय IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) के केसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कंसलटेंट गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. दीप्ती गुप्ता बताती हैं कि पुरुषों में लगातार बढ़ रही नशे की आदत, ध्रूममान व शराब की आदतों से उसकी सेहत पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। अगर आईवीएफ की संख्या में 50 फिसदी महिलाओं की वजह बढ़ोतरी हुई है तो 50 फीसदी केस पुरुषों की वजह से भी सामने आ रहे हैं। यही सबसे बड़ा कारण है कि महिलाएं या तो देर से गर्भधारण या बिल्कुल भी नहीं कर पा रही हैं। लड़कियों में पीसीओडी (पॉलिसिस्टिक ओवरी डिजीज) के 30 प्रतिशत तक केस बढ़ रहे हैं। अगर इसका सही समय पर इलाज न हो तो शादी के बाद लड़कियों में गर्भधारण में परेशानी हो रही है।
इस तरह के लोग ले रहें आईवीएफ का सहारा
1: ऐसी महिलाएं जो ज्यादा उम्र में गर्भधारण नहीं कर पाती या तो उनकी ओवरी में अंड़ों की संख्या कम या क्वालिटी कम होती है।
2: जो महिलाएं पीसीओडी से ग्रस्त है या किसी इंफेक्शन या टीबी के कारण ट्यूब्स बंद हो गई है।
4: पुरुषों में भी बढ़ रही है इनफर्टिलिटी की समस्या
नए एएआटी बिल 2021 के अनुसार, आईवीएफ के लिए महिलाओं की ऊपरी आयु सीमा 50 वर्ष और पुरुषों की 55 वर्ष है। लेकिन फिर भी महिलाएं बढ़ी उम्र में भी इसको अपनाना चाहती हैं।
ज्यादा उम्र में आईवीएफ कराने के दुष्प्रभाव
1: ज्यादा उम्र में आईवीएफ करवाने पर एग्ग की फर्टिलिटी कम हो जाती है और एग्ग को डोनेट करना पढ़ेगा। इसमें जो एंब्रियो बनेगा है या बच्चा आएगा उसमें आपका जेनेटिक मैटेरियल नहीं होगा
2 डोनेट एग्ग से हुई प्रेगनेंसी से कॉम्प्लिकेशन होती हैं और ऑपरेशन डिलीवरी होने के चांस ज्यादा होते हैं।
3. इस तरह की प्रेगनेंसी में गर्भपात हो सकता है और हाई ब्लड प्रेशर शुगर की दिक्कतें हो सकती हैं।
4. अगर वेवी केयर 50 साल के बच्चा करने से उसके आगे जाकर उसके लालन पोषण मैं मुश्किलें पैदा हो सकती है
एक मामला आया सामने
कई बार ऐसा होता है कि कम उम्र की लड़कियों को भी आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता है। हाल ही में बंसल अस्पताल में डॉक्टर दीप्ति गुप्ता के सामने एक ऐसा ही केस आया है। जिसमें 23 साल की लड़की को दोनों ओवरी में ट्यूमर बताया गया, क्योंकि उनकी कमी थी और शादी नहीं हुई थी यह दोनों ट्यूमर दूरबीन पद्धति द्वारा निकाले गए और ओवरी को सुरक्षित रखा गया, लेकिन जब यह ट्यूमर बायोप्सी की जांच के लिए गया तो इनमें बॉर्डर लाइन सिस्टेडेनोमा बताया गया। जो आगे जाकर कैंसर में परिवर्तित हो सकते थे। इस वजह से युवती की दोबारा दोनो ओवरीस निकलवाली पड़ी। अब महिला एचआरटी / हार्मोन हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी पर है। जिसमें आप बाहर से हार्मोन लेते हैं। जिनकी शरीर में कमी हो रही है। अब शादी के बाद उसे गर्भधारण करने के लिए एक डोनेशन की मदद लेनी होगी।
कंसलटेंट गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. दीप्ती गुप्ता
गलत डाइट, लाइफस्टाइल, फिजिकल एक्सरसाइज न करने की आदत भी कई प्रॉब्लम की वजह है। इसी वजह से लड़कियां पीसीओडी की शिकार हो रही हैं। जिसकी वजह से गर्भधारण में समस्या आती है। तो वहीं पुरुष में भी जिम व डाइटिंग व ज्यादा प्रोटीन लेने की वजह से स्पर्म लेवल में कमी आती है। अगर सही लाइफस्टाइल और एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल किया जाए तो इन सभी समस्याओं से निजात पा सकते हैं।
संतान न होना एक बड़ी मानसिक त्रासदी होती है। कपल्स में खुद को जज किए जाने की आशंका घर कर जाती है। भारतीय समाज में स्त्री के मन मस्तिष्क में घर को बच्चा देने का दबाव होता है। जबकि पुरूष की भी मर्दानगी दांव पर लगी होती है। कई बार अवसाद, स्वयं को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति भी देखने को मिलती है।
डॉ सत्यकांत त्रिवेदी,वरिष्ठ मनोचिकित्सक एवं विचारक
Published on:
25 Jul 2022 07:08 pm
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