
महिलाओं से पूछ रहे सीने की माप, वन सेवा भर्ती का मामला
भोपाल @अशोक गौतम की रिपोर्ट...
सरकार ने राज्य वन सेवा परीक्षा में वन संरक्षक पदों पर महिलाओं की भर्ती के लिए विवादित शर्त रख दी है। इसमें महिलाओं के लिए सीने की परिधि का मापदंड 74 सेंटीमीटर तय किया गया है। शारीरिक परीक्षण के दौरान 5 सेंटीमीटर सीना फुलाना भी पड़ेगा। यदि इस मापदंड पर महिलाएं खरी नहीं उतरती हैं तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
राज्य लोक सेवा आयोग के विज्ञापन में भी स्पष्ट है कि शारीरिक मापदंड परीक्षण राज्य शासन द्वारा किया जाएगा। जबकि पुलिस भर्ती में महिलाओं के सीने को लेकर कोई नियम नहीं है। पीएससी ने दिसंबर 2017 में भी ऐसा विज्ञापन निकाला था। विरोध के बाद सरकार को नियम हटाना पड़ा था।
वन विभाग ने ऐसे झाड़ा पल्ला
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य वन सेवा के लिए भर्ती सेवा शर्तें भारत सरकार ने तय की है। हम सिर्फ पालन करा रहे हैं। शारीरिक मापदंडों का निर्धारण डायरेक्टर ऑफ फारेस्ट एजुकेशन और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा तय किए जाते हैं। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक धर्मेन्द्र वर्मा का कहना है कि सीने की माप से मतलब फेफडे़ की क्षमता मापना है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की सचिव रेनु पंत ने कहा कि उन्होंने अभी नियम नहीं देखा है। वह इसे देखकर ही बता पाएंगी।
महिला और पुरुष उम्मीदवारों को शारीरिक परीक्षण के दौरान चार घंटे तक पैदल चलना भी अनिवार्य किया गया है। पुरुषों को चार घंटे में 25 किमी और महिलाओं को 14 किमी पैदल चलना होगा।
यह नियम महिलाओं का अपमान
निर्लज्यता की हद है कि भर्ती में महिलाओं के सीने का नाप लेने का प्रावधान किया है। यह महिलाओं का अपमान है।
यशोधरा राजे सिंधिया, पूर्व मंत्री
वन सेवा भर्ती में आपत्तिजनक शर्त रखी गई है। प्रदेश सरकार को यह नियम तत्काल हटाना चाहिए।
माया सिंह, पूर्व मंत्री
महिलाओं के लिए भर्ती में इस तरह का मापदंड रखना गलत है। यह बेवकूफी वाला कदम है।
निर्मला बुच, पूर्व मुख्य सचिव मप्र
महिलाओं की भर्ती के मामले में पुरुषों के समान मापदंड नहीं रखे जा सकते।
वीणा घाणेकर, पूर्व आइएएस व सपाक्स नेता
Published on:
09 Dec 2019 09:36 am
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
