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7 साल बाद पहनेंगे जूते-चप्पल : चुनाव हारकर खाई थी कसम, 3 बार हारने के बाद अब 3 हजार वोटों से जीते

विक्रम भालेश्वर नामक शख्स सात साल बाद अपने पैरों में जूते-चप्पल पहनेंगे। इसके पीछे की वजह बेहद रोचक , आप भी जानिए क्या है वो वजह।

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7 साल बाद पहनेंगे जूते-चप्पल : चुनाव हारकर खाई थी कसम, 3 बार हारने के बाद अब 3 हजार वोटों से जीते

भोपाल. मध्य प्रदेश के भोपाल में रहने वाले विक्रम भालेश्वर सात साल बाद अपने पैरों में जूते-चप्पल पहनेंगे। इसके पीछे की वजह बेहद रोचक है। वजह ये है कि, वो इस बार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते हैं। वर्ष 2015 चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने प्रण लिया था कि, जब तक चुनाव नहीं जीतेंगे, तब तक वो जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे।

वैसे तो आमतौर पर वोट लेने के लिए जनता के हर सुख-दुख में साथ निभाने का वादा करने वाले प्रत्याशी चुनाव हारते ही गायब हो जाते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में में एक ऐसे नेता जी भी हैं, जिन्होंने चुनाव हारने के बाद ये प्रण ले लिया था कि, जब तक चुनाव नहीं जीतेंगे तब तक अपने पैरों में जूते-चप्पल नहीं डालेंगे। इसके बाद से पिछले सात वर्षों तक वो अपने प्रण के अनुसार, बिना जूते-चप्पल ही नजर आते रहे। लेकिन, इस बार चुनाव में जीतने के बाद अब वो पैरों में जूते-चप्पल पहनेंगे। हालांकि, इस संबंध में विक्रम का कहना है कि, पहले वो क्षेत्र की जनता का आशीर्वाद लेंगे, इसके बाद ही वो अपना प्रण तोड़कर पैरो में जूते या चप्पल पहनेंगे।

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3,137 वोटों से हासिल की जीत

हाल ही में मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत के चुनाव संपन्न हुए हैं। बीते गुरुवार 14 जुलाई को जिला पंचायत के सदस्यों के परिणाम घोषित हुए हैं। भोपाल के ओल्ड कैंपियन स्कूल में शुक्रवार 15 जुलाई को जिला निर्वाचन अधिकारी अविनाश लवानिया ने सभी 10 सदस्यों को प्रमाण पत्र दिये। इस दौरान वार्ड नंबर-8 के विजेता सदस्य विक्रम भालेश्वर भी प्रमाण पत्र लेने आए थे। इस चुनाव में उन्होंने 3,137 वोटों से जीत हासिल की है।


पिछली बार सिर्फ 62 वोटों से हार गए थे

मीडिया से चर्चा के दौरान विक्रम भालेश्वर ने बताया कि, इन चुनाव को जीत कर उनका प्रण पूरा हो गया है। उन्होंने कहा, सात साल पहले सिर्फ 62 वोटों से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव वह हार गए थे। इससे पहले वे जिला पंचायत और मंडी समिति सदस्यों के दो चुनाव और हार चुके थे। तब उन्होंने कसम खाई थी कि जब तक चुनाव नहीं जीतेंगे, तब तक जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे।

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