
भोपाल। हखून यानि रक्त एक ऐसी चीज जो हमारी रगों में दौड़कर हमारी जिंदगी तो बचाता ही है, साथ ही जरूत पड़ने पर दूसरों को भी शक्ति देता है। हालांकि इसके अभाव में कई लोग जान भी गंवा देते हैं। यदि देश की मात्र दो फीसदी आबादी भी रक्तदान करे तो खून की कमी को पूरा किया जा सकता है, लेकिन जागरूकता के अभाव में ऐसा नहीं हो रहा। एक ओर जहां देश और प्रदेश की बड़ी आबादी रक्तदान करने से बच रही है, तो दूसरी ओर प्रदेश में कुछ ऐसे भी रक्तवीर भी हैं, जो रक्तदान कर जीवनदान दे रहे हैं। कुछ लोग इस क्षेत्र में वर्षों से काम कर रहे हैं।
66 वर्ष में भी मदद को तैयार
विदिशा के हैं विनोद छिपिन सर्राफ। उम्र है 66 वर्ष। उन्होंने बीते 29 अप्रेल को 153वीं रक्तदान किया है। खेल में रुचि रखने वाले, किसानी करने वाले विनोद के अनुसार रक्तदान को लेकर भ्रांतियां ज्यादा हैं, जबकि ऐसा है नहीं। गुलाब के पेड़ से कलम छंटाई के बाद नए गुलाब और खूबसूरत निकलते हैं, ठीक ऐसे ही हमारे शरीर में खून के साथ होता है।
3 लाख से ज्यादा को उपलब्ध कराया खून
रक्तदान को लेकर इंदौर में कॉल सेंटर चलाने वाले अशोक नायर 14 वर्ष से लोगों की टूटती सांस का सहारा बने हुए हैं। वे तीन लाख से ज्यादा लोगों को खून उपलब्ध करवा चुके हैं। नायर के पास हजारों रक्तदाताओं की टीम है।
इंदौर से संचालित सेंटर में 12 से 14 लोगों का स्टाफ समन्वय रखता है।
65 हजार यूनिट से ज्यादा रक्तदान
बैतूल जिले के शैलेंद्र बिहारिया रक्तदान को लेकर 30 वर्ष से काम कर रहे हैं। 65 हजार यूनिट से ज्यादा रक्तदान करवा चुके हैं। उनके साथ लगभग चार हजार लोग जुड़े हुए हैं। शैलेंद्र बताते हैं, आदिवासी जिला होने के बावजूद लोग रक्तदान को लेकर जागरूक हैं। इस इलाके में सिकलसेल और थैलेसीमिया के मरीज ज्यादा हैं, इसलिए रक्त की जरूरत ज्यादा होती है।
ऐसे समझें अपने प्रदेश की स्थिति
मप्र में हर साल सात लाख यूनिट रक्त की जरूरत होती है, जबकि 4.50 लाख यूनिट ही मिल पाता है। राज्य रक्ताधान परिषद की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रूबी खान के अनुसार प्रदेश की जनसंख्या के हिसाब से अब भी उतना रक्तदान नहीं हो रहा है। लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
Published on:
14 Jun 2022 11:52 am
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