29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कुछ इस तरह आदत में बदल गया सेवा करने का जज्बा

आज पूरे विश्व में वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जा रहा है और उन लोगों को सराहा जा रहा है जिन्होंने अपने इस नेक कदम से किसी जरूरतमंद की मदद की।

3 min read
Google source verification

image

Alka Jaiswal

Jun 14, 2016

world blood donor day

world blood donor day


भोपाल। आज पूरे विश्व में वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जा रहा है और उन लोगों को सराहा जा रहा है जिन्होंने अपने इस नेक कदम से किसी जरूरतमंद की मदद की। हम भी आपको आज ऐसी कुछ कहानियां बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप भी इन लोगों से इंस्पायर हो जाएंगे।

blood donor day

घायल के परिजन ने दी दुआएं
मेरी स्कूली शिक्षा भोपाल से ही हुई है। वर्ष 1978 में कॉलेज की पढ़ाई के लिए मुझे एक रिश्तेदार के यहां गुजरात के आणंद भेज दिया। वहां एक साल बाद ही मैं अपने दोस्तों के साथ कॉलेज से पैदल घर लौट रहा था। अचानक हमारे सामने बाइक सवार युवक डिवाइडर से टकराकर गिर गया। हम दौड़े, कुछ मिनटों में उसे भागते हुए नजीदीकी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने बताया कि तीन यूनिट खून चाहिए। संयोग से घायल का ग्रुप मेरे ग्रुप से मैच कर गया। मैने डॉक्टर से कहा कि तीनों यूनिट मेरी ले लीजिए। डॉक्टर ने हंसने लगे, बोले एक बार में एक ही यूनिट ले सकते हैं। इतना ही जोश है तो आगे जब भी जरूरत पड़े रक्तदान कर देना। कुछ ही देर में दोस्तों की मदद से बाकी दो यूनिट की व्यवस्था भी हो गई और युवक की जान भी बच गई। इसमें रात हो गई। घायल के परिवार वाले अस्पताल पहुंचे तो हमें ढेरों दुआएं दीं। तभी से प्रण कर लिया साल में कम से कम एक बार रक्तदान जरूर करूंगा। 20 फरवरी को जन्मदिन पर ब्लड बैंक जरूर पहुंच जाता हूं, इसके अलावा जब भी किसी को जरूरत पड़ती है रक्तदान करता हूं।
दीपक शर्मा, उद्यमी, प्रदेशाध्यक्ष मप्र लघु उद्योग संघ(रक्तदान- 25 से 30 बार, ग्रुप-ओ पॉजीटिव)

blood donor day

शादी में जाने से पहले रक्तदान
यूं तो मैं वर्ष 1980 से रक्तदान कर रहा हूं, लेकिन तब तक इतना जुनूनी नहीं था। बात वर्ष 1984 की है, मुझे एक शादी में जाना था, घर से निकल ही रहा था कि ट्रैफिक डीएसपी पाठक का फोन आया। उन दिनों ट्रैफिक वार्डन के रूप में सेवाएं दिया करता था इसलिए उनसे जान-पहचान थी। उन्होंने बताया कि रॉयल मार्केट में बाइक सवार दो युवकों का एक्सीडेंट हो गया है, उन्हें तुरंत खून की जरूरत है। मैं तुरंत हमीदिया पहुंच गया और रक्तदान किया। जल्दबाजी में हाथ हिलाने से कुछ खून निकल गया। जब शादी में पहुंचा तो शर्ट पर खून देखकर सभी चितिंत हो गए। जब मैंने घटना बताई तो सभी ने तारीफ की और एक रिश्तेदार ने तुरंत नई शर्ट निकालकर मुझे दे दी। बात यहीं खत्म नहीं हुई, अगले दिन एसपी ऑफिस से मुझे बुलाया तो मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि क्यों बुलाया गया है? आफिस पहुंचा तो देखा एसपी पन्नालाल जी के साथ डीएसपी पाठक और अन्य अफसर बैठे थे। एसपी ने मेरी तारीफ करते हुए बहुत प्रोत्साहित किया। एक रक्तदान से इतना प्रोत्साहन मिलने के बाद मैं दोगुने जोश से इस मुहिम में जुट गया जो आज तक जारी है।
कमल भंडारी, इंवेट मैनेजमेंट कम्पनी संचालक(रक्तदान- 55 से 60 बार , ग्रुप- बी पॉजीटिव)

blood donor day

उस सैनिक ने लगा लिया गले
वर्ष 1996 में कश्मीर में पाकिस्तान की सीमा से सटी पोस्ट पर तैनात था। हड्डियां गलाने वाली ठंड हमेशा रहती थी। एेसी ही एक सुबह, हम ड्यूटी पर थे, कि अचानक दुश्मन ने आर्टिलरी खोल दी। जवान संभल पाते उससे पहले ही एक गोला आया और फट गया। हमारे तीन फौजी घायल हो गए, मैं मेडिकल कोर का सदस्य था। हम घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर भागे। अस्पताल में अफरा-तफरी मची थी। घायलों की संख्या बढ़ रही थी। जिन जवानों को लेकर मैं पहुंचा था. उनमें से एक का ब्लड ग्रुप मुझसे मैच हो गया। मैने तुरंत उसे ब्लड दिया। कई महीनों बाद उस सैनिक से मुलाकात हुई तो मुझे देखते ही उसने न केवल मुझे गले लगा लिया, बल्कि अपनी मां से बात भी कराई। इसके पहले भी मैं रक्तदान कर चुका था लेकिन इस घटना ने मेरे दिल को यूं छुआ कि मैं हर 120 से 130 दिन पर रक्तदान करने लगा। भोपाल आने के बाद भौंरी में आईआईएसईआर (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एज्यूकेशन एंड रिसर्च) मेडिकल स्टाफ में जुड़ गया। यहां सबके सहयोग से 26 जनवरी और 15 अगस्त को रक्तदान शिविर लगाते हैं।
शशि शंकर, सेवा निवृत्त सैनिक(रक्तदान- 20 से 25 बार, ग्रुप -एबी पॉजीटिव)

ये भी पढ़ें

image
Story Loader