
आज 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस (World Radio Day) है। संचार माध्यम के तौर पर रेडियो हमेशा से चर्चा का विषय रहा। एक समय था जब रेडियो सूचना का एक बड़ा माध्यम था। आपदा या आपातकालीन स्थिति में रेडियो का महत्व बढ़ जाता था। इसके अलावा मनोरंजन क्षेत्र में भी रेडियो ने अपनी अलग-अलग पहचान बनाई थी। बदलते समय के साथ नए-नए संचार माध्यम आए और रेडियो का चलन कम होता चला गया। आज युवाओं को रेडियो की जरूरत और महत्व के बारे में बताने के लिए वर्ल्ड रेडियो दिवस मनाया जाता है।
मध्यप्रदेश में रेडियो कि शुरूआत
मध्य प्रदेश में कुल 27 रेडियो स्टेशन हैं। सबसे पहला केंद्र इंदौर में 22 मई 1955 में स्थापित हुआ था। भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, छतरपुर, रीवा, और सागर में भी आकाशवाणी केंद्र हैं। इंदौर से ही पहले आकाशवाणी की शुरुआत हुई थी। आज मध्य प्रदेश में तीन निजी क्षेत्रों में एफएम सेवा है, जिसमें से पहला प्राइवेट रेडियो स्टेशन "रेडियो मिर्ची" है, जिसकी शुरुआत 9.3 डिग्री पर इंदौर में हुई थी।
भारत में कब आया रेडियो
भारत में रेडियो प्रसारण 1922 में आरंभ हुआ था, जब देश ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत था। 1936 में सरकार ने 'ऑल इंडिया रेडियो' का संचालन शुरू किया। इसके पहले, 1923 में मुंबई प्रेसिडेंसी रेडियो क्लब के माध्यम से निजी रेडियो प्रसारण भी था। 1927 के एग्रीमेंट के बाद, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी को मुंबई और कोलकाता में रेडियो स्टेशन स्थापित करने की अनुमति मिली। आजाद भारत में 6 रेडियो स्टेशन स्थापि किए गए थें। जो दिल्ली, बॉम्बे, कोलकाता, मद्रास, तिरुचिरापल्ली, और लखनऊ में स्थित हैं।
13 फरवरी को ही क्यों मनाया जाता है विश्व रेडियो दिवस
13 फरवरी 1946 में संयुक्त राष्ट्र रेडियो की शुरुआत हुई थी। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय रूप से रेडियो दिवस मनाने के लिए 13 फरवरी की तारीख को चुना गया। इसे संयुक्त राष्ट्र रेडियो की वर्षगांठ के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है। हर साल इस दिन की एक थीम निर्धारित होती है.
Published on:
13 Feb 2024 05:33 pm

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