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World Sleep Day 2023 : 32% लोगों को है ‘स्लीप एपनिया’, खर्राटों से टूट रही लोगों की नींद

-एम्स की रिसर्च में खुलासा... 50 से अधिक उम्र वाले ज्यादा पीड़ित, खर्राटे वाले बच्चों को पढ़ने में परेशानी-32% लोगों को स्लीप एपनिया, खर्राटों से टूट रही नींद... हाई बीपी, हृदय रोग व हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारी भी

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World Sleep Day 2023

भोपाल। मध्यप्रदेश में 32 फीसदी लोग स्लीप एपनिया (खर्राटे) की बीमारी से ग्रसित हैं। सोते वक्त इनकी सांस कुछ पल के लिए रुकती है और नींद टूट जाती है। नतीजन ऐसे लोग बीपी, शुगर, हार्ट अटैक और डिप्रेशन की चपेट में आ रहे हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के शोध में यह खुलासा हुआ है।

1080 मरीजों पर शोध

1080 मरीजों पर किए गए शोध में पता चला है कि स्लीप एपनिया से पीड़ित कुल 32% लोगों में से 66% को बीपी है। 50 वर्ष के बाद लोग इससे पीड़ित हो रहे हैं। एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि खर्राटों को नजरअंदाज न करें। ये घातक हो सकते हैं। स्लीप एपनिया के मरीज आम व्यक्ति के मुकाबले दो घंटे कम या ज्यादा नींद ले रहे हैं।

बच्चों का पढ़ाई में नहीं लगता मन

रिसर्च कहती है कि 5 से 10 साल तक के 10 फीसदी बच्चों को भी खर्राटे आ रहे हैं। ऐसी समस्या होने पर बच्चे रात में बार-बार पेशाब के लिए उठते हैं। पढ़ाई में मन नहीं लगता। सोते समय सांस रुक जाती है। बच्चा हाईपर एक्टिव हो जाता है। यदि ऐसे लक्षण हैं तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

40 पार होने पर 45% लोग शिकार

-आयुवर्ग के हिसाब से देखें तो 18 से 40 साल तक के 20 फीसदी युवा स्लीप एपनिया की चपेट में आ रहे हैं।

-40 वर्ष के बाद 45 फीसदी लोगों को खर्राटे की समस्या है। 40 फीसदी महिलाएं तो 60% पुरुष इस परेशानी से जूझ रहे हैं।

रीचार्ज होने के लिए नींद जरूरी

बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के योग विभाग की एचओडी डॉ. साधना दौनेरिया ने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए नींद प्रमुख है। शारीरिक और मानसिक स्तर पर थका हुआ व्यक्ति नींद में अनजाने में ही गलत अवस्था में पहुंच जाता है। जिससे लाभ की बजाय उसका स्वास्थ्य विपरीत रूप से प्रभावित होता है। बैठे-बैठे बहुत कम समय के लिए झपकी लेना अच्छा है, मगर बैठे-बैठे बार बार सोना बीमारी का भी संकेत है। अत्यधिक गहरा सोना, बिस्तर पर घूमना, सोते समय बोलना इत्यादि लक्षण देखे जा सकते है।

ज्यादा या कम नींद आना दोनों इस बीमारी में होता है। अमूमन चार में से एक महिला तो तीन में एक पुरुष को खर्राटे की बीमारी होती है। मुख्य कारण मोटापा है। इसे दवाईयों और मशीन से कंट्रोल करते हैं, ताकि मरीज चैन की सांस ले सके।

-डॉ. अभिषेक गोयल, पल्मोनरी विशेषज्ञ, एम्स भोपाल का कहना है कि ज्यादा या कम नींद आना दोनों इस बीमारी में होता है। अमूमन चार में से एक महिला तो तीन में एक पुरुष को खर्राटे की बीमारी होती है। मुख्य कारण मोटापा है। इसे दवाईयों और मशीन से कंट्रोल करते हैं, ताकि मरीज चैन की सांस ले सके।

अच्छी नींद के उपाय

-नियमित योगाभ्यास, सोने से एक घंटे पहले फोन से दूर हो जाए।

-सोने से पहले डीप ब्रीदिंग करें।

-बिस्तर में श्वासन की स्थिति में लेटें।

-अत्यंत धीमी ध्वनि का संगीत भी मदद कर सकता है।

-दिन में शारीरिक श्रम जरूर करें।

-सोने के दो घंटे पहले भोजन करें।