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WORLD WATER DAY: ताल-तलैयों का शहर फिर भी यहां जल संकट

विश्व जल दिवस पर विशेष : भरपूर पानी वाले शहर में जल स्रोतों की अनदेखी ने बढ़ाई परेशानी

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WORLD WATER DAY BHOPAL

WORLD WATER DAY BHOPAL

भोपाल. ताल-तलैयों के शहर के रूप में पहचाने जाने वाले भोपाल में गर्मी की शुरुआत होते ही जल संकट दिनोंदिन विकराल होने लगा है। सरकारी दस्तावेजों में भले ही 14 तालाब दर्ज हों, पर मौजूदा समय में इनकी बदहाली किसी से छिपी नहीं है। नतीजतन पर्याप्त जल स्रोतों की उपलब्धता के बाद भी शहर को पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। भू-जल का बेतहाशा इस्तेमाल तो कर रहे हैं, पर बारिश के पानी को जमीन में उतारने के पुख्ता इंतजाम नहीं होने से जल-स्तर गिर रहा है।

बड़े तालाब की तलहटी से खींच रहे पानी

14 तालाबों में से सिर्फ बड़े तालाब के पानी का उपयोग पेयजल में किया जा रहा है। यहां से रोजाना 23 एमजीडी पानी लिया जा रहा है और तालाब डेड लेवल 1652 फीट से महज तीन फीट ज्यादा 1655 फीट पर है। यहां से कम पानी लेने की तमाम दावे नगर निगम ने किए, पर ये हकीकत नहीं बन सके। हालात ये हैं कि अब तालाब की तलहटी में पहुंच गए पानी को अतिरिक्त मोटर लगाकर खींचा जा रहा है।

अतिक्रमण पर अंकुश नहीं

लेंडिया तालाब के 82 फीसदी भाग पर कब्जा है। इस तालाब का क्षेत्रफल 1.05 हेक्टेयर था। 113 हेक्टेयर के हथाईखेड़ा डैम के 23त्न भाग पर कब्जे हैं। बड़े तालाब का 19, छोटे तालाब का 13 प्रतिशत, मुंशी हुसैन खां तालाब का सात प्रतिशत, मोतिया तालाब का दो प्रतिशत भाग कब्जे की भेंट चढ़ चुका है।

ऐसे खत्म हो रहा तालाबों का अस्तित्व

राजधानी के 14 छोटे-बड़े तालाबों में से तीन का अस्तित्व खत्म हो चुका है। दो अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। मोतिया तालाब पर सीमेंट-कांक्रीट का जंगल खड़ा हो गया है। गुरुबक्श की तलैया व अच्छे मियां की तलैया का नामोनिशां तक नहीं बचा है। नवाब सिद्दीक हसन तालाब अतिक्रमण से घिरा है। इस तालाब के एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में से 98 प्रतिशत पर कब्जा है। शेष दो प्रतिशत हिस्सा जलकुंभी से पटा है।

जल स्रोतों में मिल रहा सीवेज

झील संरक्षण प्राधिकरण की रिपोर्ट में बड़े तालाब के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो रही है। इसकी वजह तालाब में गंदगी का बढऩा है। बोर्ड ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के अनुसार पानी में पीएच 6.5 से 8.5 होना चाहिए। बड़े तालाब के पानी में पीएच 8.7 से 9.0 तक है। तलहटी में ऑक्सीजन की मात्रा 3.6 मिग्रा निकली, जो मानक से कम थी।

वाटर हार्वेस्टिंग से बना रखी है दूरी

बारिश के पानी को जमीन में उतारकर भू-जल बढ़ाने की योजना भी अमल में नहीं आ सकी। अब तक महज 10 हजार घरों में ही ये सिस्टम लगाया गया है। वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा द्वारा जमा कराई जाने वाली रिफंडेबल राशि 10 करोड़ रुपए के करीब पहुंच गई है। यानी लोगोंं ने रूफ वाटर हार्वेस्टिंग की जगह राशि वापिस नहीं लेना ही ठीक समझा।

90 फीसदी कॉलोनियों में एसटीपी नहीं

राजधानी की करीब 1800 कॉलोनियों में से 90 फीसदी से अधिक में निस्तार के पानी को खुले में बहाया जाता है। नियमानुसार यहां एसटीपी लगाकर पानी को फिर से उपयोग लायक बनाना जरूरी है। इस नियम का न तो नगर निगम पालन करा पाया और न ही कॉलोनियों की समितियों ने इसमें रुचि ली। गंदे पानी को बिना ट्रीट किए खुले में छोडऩे से राजधानी के जल स्त्रोत प्रदूषित हो रहे हैं।

झीलों का शहर भोपाल, राजधानी में ये तालाब

छोटे-बड़े तालाब
बड़ा तालाब
छोटा तालाब

शाहपुरा तालाब
मोतिया तालाब
नवाब सिद्धिक हसन तालाब
मुंशी हुसैन खां तालाब
सारंगपाणी तालाब

लहारपुर जलाशय
हथाईखेड़ा जलाशय
चार इमली तालाब
लेंडिया तालाब
गुरुबक्श की तलैया
अच्छे मियां की तलैया