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सौ साल पुराने अखाड़े में तराश रहे पहलवान, दुनिया में दिखा रहे दम

पिछले 20 साल से पहलवानी के दावं-पेंच सीखा रही पति-पत्नी की जोड़ी

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सौ साल पुराने अखाड़े में तराश रहे पहलवान, दुनिया में दिखा रहे दम

सौ साल पुराने अखाड़े में तराश रहे पहलवान, दुनिया में दिखा रहे दम

भोपाल. नवाबी दौर की कई इमारतें ऐसी हैं, जो आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर देती हैं। वहीं एक अखाड़ा ऐसा भी है, जिसमें नवाबी दौर से अच्छे-अच्छे पहलवान निकल चुके हैं, जिन्होंने नेशनल लेवल पर अपने प्रतिद्वंद्वियों को धूल चटाई है। बात हो रही है छोटे तालाब स्थित अखाड़ा टे्रनिंग स्कूल गप्पू उस्ताद मरहूम की। जिसमें आज भी कई नेशनल और इंटरनेशनल खिलाड़ी कुश्ती खेल के दावं पेच सीख रहे हैं। इन खिलाडिय़ों को पति-पत्नी की जोड़ी तराश रही हैं। जिन्होंने अभी तक दो दर्जनों से ज्यादा नेशनल और इंटरनेशनल पहलवान तैयार किए हैं। विश्वामित्र अवार्डी शाकिर नूर और देश की पहली महिला मुस्लिम पहलवान फातिमा बानो युवा पहलवानों को ट्रेनिंग देती हैं। फिलहाल इस अखाड़े को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

यही सीखी पहलवानी, अब निखार रहे प्रतिभा
विश्वामित्र अवार्डी कोच शाकिर नूर ने बताया कि सौ साल पूर्व छोटे तालाब का एरिया डेवलप नहीं था। यहां गप्पू उस्ताद ने एक अखाड़ा बनवाया था। तब यहां टूटा-फूटा कब्रिस्तान हुआ करता था। तालाब के किनारे से नाला बहता था इस कारण इस अखाड़ें का नाम 'नलियाÓ और अखाड़े में पत्थर लगे होने के कारण 'पत्थर वाले अखाड़ेÓ से भी जाना जाता था। 1975 में मैं यहां टे्रनिंग लेता था। यहां से सीखने के बाद कई नेशनल भी खेला। इसके बाद 1998 में मैंने यहां खुद का अखाड़ा ट्रेनिंग सेंटर खेलने का विचार किया और रजिस्टे्रशन करवाया कुछ अच्छा नाम सोचा। फिर इसका नाम अखाड़ा ट्रेनिंग स्कूल गप्पू उस्ताद मरहूम पड़ा। साई सेंटर ने 2004 में इसे यहां से अच्छे पहवान निकलने गोद लिया था।

पहली महिला मुस्लिम पहलवान हैं फातिमा
फातिमा जूडो की खिलाड़ी रहीं। 44 साल की फातिमा ने कुश्ती की शुरुआत 1997 में भोपाल से की। पिता सैयद नसरूल्ला बीएचएल में थे। मां निशा बानो गृहिणी थीं। फातिमा 2001 में विक्रम अवॉर्डी बनीं और यह मुकाम हासिल करने वाली वे पहली कुश्ती खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2004 से 2016 तक खेल विभाग में सेवाएं दीं। 2002 से कोच के रूप में दूसरी पारी शुरू की और गांव-देहात से ऐसी प्रतिभाएं खोजीं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकीं। इन्हें अखाड़ा ट्रेनिंग स्कूल में अपने खर्च से गढ़ा। वहीं, भोपाल कॉर्पोरेशन कुश्ती संघ के सचिव और विश्वामित्र अवार्डी शाकिर नूर ने बताया कि हम दोनों पिछले 20 साल से युवा खिलाडिय़ों को तराश रहे हैं। कई खिलाडिय़ों को आर्थिक दंगी के कारण निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं।