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अतीत का झरोखा : प. बंगाल की महिला ने 7 साल किया शाजापुर का नेतृत्व

न्यायालय में काम करने वाली ताराज्योति ने बाद में शिक्षिका...
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भोपाल

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Deepesh Tiwari

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Updated: 2 Nov 2018, 10:29 AM IST

old memories of politics

अतीत का झरोखा : प. बंगाल की महिला ने 7 साल किया शाजापुर का नेतृत्व

पश्चिम बंगाल से शाजापुर आई शिक्षिका ताराज्योति शर्मा दो बार विधायक चुनी गईं। दूसरे कार्यकाल में बीमारी के कारण उनका निधन हो गया।

भारत के आजाद होने के पहले पश्चिम बंगाल में मानद उपाधि प्राप्त कर वहां न्यायालय में काम करने वाली ताराज्योति ने बाद में शिक्षिका की नौकरी की। आजाद भारत में उनकी पोस्टिंग शाजापुर के शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या विद्यालय में हुई।

यहां 1949 में उनका विवाह कांग्रेस नेता प्रभागचंद शर्मा से हो गया। कांग्रेस ने 1967 के विधानसभा चुनाव में प्रभागचंद को शाजापुर प्रत्याशी बनाया। प्रभागचंद को उनके दामाद रमेशचंद दुबे ने पराजित कर दिया। इसके बाद 1971 में उनका निधन हो गया। ऐसे में 1972 में ताराज्योति चुनाव लड़ी और जीतीं।

विधायक बनने के बाद ताराज्योति ने विधानसभा क्षेत्र में लोगों से जीवट संपर्क बनाया और विकास कार्य कराए। उनके शासनकाल में ही 1976 में गांधी हॉल के निर्माण के लिए नींव रखी गई थी।

उनकी स्पष्टवादिता और सिद्धांतवादी छवि के चलते कांग्रेस ने 1980 में उन्हें दोबारा शाजापुर से टिकट दिया। वे दोबारा विधायक बन गईं। हालांकि, करीब दो साल से ज्यादा का कार्यकाल पूरा करने के बाद बीमारी के चलते सन 1983 में उनका निधन हो गया था।

कैबिनेट में लेना चाहते थे सीएम...
तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी अपनी कैबिनेट में ताराज्योति को शामिल करना चाहते थे। उन्हें भोपाल भी बुलवाया गया। अगले दिन दोपहर दो बजे उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात होना था, जिसमें मंत्री बनाने की तैयारी थी। ताराज्योति कैबिनेट में शामिल नहीं होना चाहती थीं। इसके चलते वे बहन के घर चली गईं।

इधर, ये होगा होगा सपाक्स का चुनाव चिन्ह!...
विधानसभा चुनाव के लिए सपाक्स पार्टी और संपूर्ण समाज पार्टी ने गुरुवार को गठबंधन कर लिया। अब सपाक्स पार्टी का चुनाव चिन्ह अंगूठी होगा। सपाक्स अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी ने इसका ऐलान किया।

वहीं, सपाक्स के प्रांताध्यक्ष केदार सिंह तोमर ने सरकारी नौकरी छोडऩे का ऐलान कर दिया। उनके इस्तीफे की एक महीने की नोटिस अवधि 31 अक्टूबर को पूरी हो चुकी है। सपाक्स पार्टी को अभी चुनाव आयोग से राजनीतिक दल का दर्जा नहीं मिला है।

इस कारण पूरे प्रदेश के लिए कोई एक चुनाव चिन्ह मिलने में परेशानी थी। संपूर्ण समाज पार्टी के पास पहले से अंगूठी चिन्ह था। वह भी आरक्षण के विरोध में है।

संपूर्ण समाज पार्टी के प्रांताध्यक्ष का पद भी केदार सिंह तोमर को दिया गया, जो अभी सपाक्स के प्रांताध्यक्ष हैं। तोमर ने बीते महीने पशुपालन विभाग में अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। इसके लिए एक महीने का नोटिस 31 अक्टूबर तक के लिए दिया गया था।