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आपने भी घर में पाल रखा है तोता-मैना, तो आपको हो सकती है जेल

भोपाल बर्ड्स सोसाइटी ने वन विभाग के साथ मिलकर अभियान शुरू किया है....

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भोपाल। आसमान में आजाद उड़ना उनका हक है, लेकिन कुछ लोग उन्हें कैद करके रखते हैं। परिंदों को कैद में रखना जुल्म है, लेकिन इनमें से कई प्रजातियां ऐसी भी हैं, जिन्हें कैद में रखना अपराध भी है। ऐसी ही संरक्षित प्रजातियों को कैद से मुक्ति दिलाने और उन्हें आजाद कराने के लिए भोपाल बर्ड्स सोसाइटी ने वन विभाग के साथ मिलकर अभियान शुरू किया है।

इसके अंतर्गत एक पोस्टर बनाकर संरक्षित श्रेणी के पक्षियों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जा रही है। पोस्टर में बताया गया है कि जिस सामान्य हरे तोते को नागरिक सबसे ज्यादा पालते हैं, वह संरक्षित श्रेणी के हैं। इसी तरह टुइय तोता, हीरामन तोता, काला सि मुनिया, हरी मुनिया, लाल मुनिया घरेलू उल्लू, कोयल, सुर्खाब, मोर जामुलनी जलमुर्गी और टिकडी सफेद छाती जलमुर्गी, गंगा मैना सफेद तीतर, सामान्य जलमुर्गी भी संरक्षित पक्षी हैं।

डीएफओ आलोक पाठक क कहना है कि कई प्रजातियां क संरक्षित घोषित किया हुआ है। इन्हीं की जानकारी देते हुए नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। यह सा पक्षी वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित है, इनको पालने पर तीन से सात साल की सजा औ जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

कैद करना है गलत

भारतीय पक्षियों को खरीदने बेचने पर प्रतिबंध है लेकिन इसके बावजूद भी कई जगहों पर गौरिया जैसी छोटी देसी चिडि़यों को पकड़कर उन्हें तरह-तरह के रंगो से रंग विदेशी पक्षी बताकर बेचा जा रहा है। हालांकि कई पेट शॉप पर असली विदेशी पक्षी भी बेचे जाते हैं। जिनके लिए बाकायदा उनके पास लाइसेंस भी होते हैं। यह पक्षी काफी महंगे भी होते हैं। मिसाल के तौर पर साउथ अमेरिका में पाए जाने वाले तोते की जाति के मकाऊ पक्षी को पालने के लिए आपको करीब 1.5 लाख रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं।

हालांकि जानवरों और पक्षियों के लिए काम करने वाली राजधानी की संगीता कै कहना है कि भले ही कानून हमें इस बात की इजाजत देता है कि हम कुछ विदेशी पक्षियों को पाल सकते हैं लेकिन नैतिक तौर पर हमें इन पक्षियों को भी पिंजरे में कैद नहीं करना चाहिए। खुले आसमान में उड़ने वाले पक्षियों को पिंजरे में कैद करना नैतिक रूप से गलत है, अब चाहे वे पक्षी भारतीय हो या विदेश से लाए गए हों।