
नाम तो सुना ही होगा- ‘टोपी’,‘बम’, ‘पेंटर’, ‘काला’,‘रेडियो’, ‘बकरा’, ‘टैंकर’, ‘बघीरा’ रईस कबूतर
भोपाल. शहर में बदमाशों को ‘टोपी’,‘बम’, ‘पेंटर’, ‘काला’,‘रेडियो’, ‘बकरा’, ‘टैंकर’, ‘बघीरा’ और ‘छू’ जैसी उर्फियत से नवाजा गया है। ये उर्फियत इनके काम के आधार पर पुलिस या लोगों ने इन्हें दी है। पुलिस की एफआइआर में इनके नाम के पीछे इनकी उर्फियत को दर्ज किया जाता है। महाराष्ट्र के साथ ही भोपाल के अपराध जगत में लिप्त बदमाशों में उर्फियत का सबसे ज्यादा चलन है। पुलिस भी इन्हें अलग-अलग पहचान देने के लिए उर्फियत का इस्तेमाल करती है। कई पुराने बुजुर्ग पुराने बदमाशों ने अब अपराध के रास्ते को छोड़ दिया। अब वो शराफत की जिंदगी बसर कर रहे हैं। किसी के पास सरकारी नौकरी है, तो कोई प्राइवेट कामकाज से अपने परिवार का पेट पाल रहा है। शहर में आज भी उनकी पहचान उनकी उर्फियत से होती है।
बदमाशों के नामकरण के रोचक किस्से
अदालत- एमपी नगर इलाके में स्थित दुर्गा नगर झुग्गी बस्ती में रहने वाले निगरानी गुंडे नफीस अदालत ने जिला न्यायालय के आसपास कई अपराध किए जिसके बाद उसका नाम अदालत पड़ गया। हाल ही में उस पर जानलेवा हमला हुआ है।
तोड़फोड़- घनश्याम को शहर में कई सालों पहले तोड़फोड़ के नाम से जाना गया। घनश्याम ने 2003 में अपराध का साथ छोड़ दिया और स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करने लगे। घनश्याम का कहना है कि पहले वो किसी की नहीं सुनता था और सीधे तोड़फोड़ शुरू कर देता था। लोगों ने ही उसे तोड़फोड़ की पहचान दी।
बच्चा- सचिन 15 साल की उम्र से ही अपराध की दुनिया से जुड़ चुका था। उस पर 15 से ज्यादा मामले में चल रहे हैं। सचिन पुणे की जेल में सजा भी काट चुका है। सचिन बचपन से ही अपराध करने लगा था, इसलिए उसे लोग सचिन बच्चा के नाम से जानने लगे।
सरदार- अपनी गैंग की लीडरशिप करने के चलते शुभम को सरदार नाम की एक नई पहचान मिली है। मामा की हत्या के बाद शुभम ने अपराध की दुनिया में कदम रखा और एक के बाद एक कर दो सालों में ही उसने 30 से ज्यादा अपराधों को अंजाम दे दिया। अब शुभम ठेकेदारी कर अपने परिवार को पाल रहा है।
विलाल- शिवम सोनवने को विलाल नाम से जाना जाता है। शिवम को विलाल नाम का सिंगर पसंद था और उसने सिंगर की तरह ही अपने बाल रखकर अपराध को अंजाम देना शुरू किया। आज शिवम प्राइवेट नौकरी कर रहा है।
छू भाई- टीलाजमालपुरा निवासी राजेश छू और उसका भाई कपिल छू दोनों ही कई मर्तबा पुलिस अभिरक्षा से फरार हो चुके हैं।
पेंटर- पुराने शहर के नामी बदमाश रहे मुन्ने पेंटर और पप्पू पेंटर मकानों में पुताई का काम करते थे। अपराध जगत में दस्तक देने के बाद इनके नामों के पीछे पुलिस ने अपने रिकार्ड में पेंटर उर्फियत जोड़ दिया।
सिक्स राउंड- जहांगीराबद के सलीम की जब भी गिरफ्तारी होती थी, तो उससे देशी कट्टा बरामद होता था। ऐसे में उसकी उर्फियत 6 राउंड हो गई।
रेडियो- इंद्रानगर निवासी बदमाश रईस एक दुकान पर रेडियो सुधारने का काम करता था, जिसे रेडियो टांगकर गाने सुनने का भी शौक था।
फूक्की- प्यारे फुक्की के पिता को भी फुक्की नाम से पहचाना जाता था, जिनकी मौत के बाद उनके बेटे प्यारे को भी फुक्की नाम से ही आज भोपाल में पहचाना जाता है।
बम -15 अगस्त 1994 में बिजली कालोनी की दीवार के पास एक बम फटा था। इस मामले में अशोका गार्डन के फईम को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद अब उसे फईम बम के नाम से जाना जाता है।
शौक और शक्ल देखकर नामकरणइन बदमाशों की भी अजीबों-गरीब उर्फियतें इनके शौक और शक्ल सूरत के कारण जानी जाती है। पहले लोगों ने मजाक में इनके नाम रखे जो अब पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हो गए। इनमें प्रमुख हैं फिरोज लोटिया, फिरोज छडी, अंकित टकलू, सचिन बच्चा, इमरान कटोरा, राकेश ढक्कन, शादाब जहरिला, दीपक अद्धा, विशाल चिराटा, जावेद चिराटा, रईस कबूतर, मून्ना टार्जन, तंजिल गोटी,सोनू एंजिल, विशाल जगिरा।
Published on:
04 Sept 2023 09:00 pm
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