डॉक्टरों का कहना है कि युवाओं में डिप्रेशन के दस में से चार मामले रिलेशनशिप के टूटने के कारण आते हैं, पोस्ट ब्रेकअप डिप्रेशन का हो रहे शिकार
भोपाल. क्लास में टॉप व हमेशा हंसने खिलखिलाने वाले युवाओं का जब प्यार में दिल टूटता है तो पढ़ाई करने में मन नहीं लगता है। साथ ही अकेले-अकेले रहने लगते हैं। ऐसे मामले में अकसर युवा एक महीने में सामान्य जीवन की ओर लौट जाते हैं। मगर जो इस सदमे से नहीं निकल पाते हैं, वह पोस्ट ब्रेकअप डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। सिर्फ हमीदिया अस्पताल में ही रोजाना ऐसे दो से तीन केस आ रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि युवाओं में डिप्रेशन के दस में से चार मामले रिलेशनशिप के टूटने के कारण आते हैं। जो लोग ज्यादा भावुक व दूसरों पर निर्भर होते हैं। उनमें यह समस्याएं ज्यादा सामने आती हैं। लड़के व लड़कियों दोनों की संख्या बराबर है। ज्यादातर मामलों में इलाज के बाद मनोदशा ठीक हुई। इसके अलावा वह अपने सामान्य जीवन में लौट गए।
हमीदिया अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ रुचि सोनी बताते हैं कि यंग जनरेशन में डिप्रेशन या एंग्जाइटी के दस में से चार मामलों में रिलेशनशिप का टूटना वजह के रूप में सामने आता है। साथ ही इसमें जेनेटिक, इंवायरमेंटल व आस-पास का महौल भी अहम फैक्टर होते हैं। ऐसे समय में परिवार के लोगों व दोस्तों का साथ बेहद जरूरी होता है। साथ ही इन मामलों में जितना जल्दी इलाज मिलेगा उतनी समस्या का कम प्रभाव शरीर पर पड़ेगा। इसमें लड़के व लड़कियों दोनों की संख्या बराबर है।
नेशनल कंपनी में काम करने वाले अशोक (बदला हुआ नाम) भी नेहा की ही तरह पोस्ट ब्रेकअप डिप्रेशन का शिकार हो गए थे। सात साल के रिलेशन के बाद जब शादी का समय आया। तो लड़की के परिवार ने साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद से बार-बार उनके मन में आत्महत्या के विचार आते थे। जिसके बाद वह इलाज के लिए चिकित्सालय आया, जहां उसकी मनोदशा भांप मानसिक रोग चिकित्सक ने इलाज शुरू किया।
स्नातक की छात्रा नेहा (बदला हुआ नाम) का तीन साल का रिलेशनशिप जब टूटा, तो वह डिप्रेशन में आ गई। वह उसके साथ जीवन बिताने के सपने देखती थी। सपना टूटने के बाद सारी बातों का जिम्मेदार खुद को मानती थी। परिवार के लोगों ने भी उसको समझाने की जगह डांटना शुरू कर दिया। हमीदिया में इलाज के दौरान डॉक्टर ने परिवार व छात्रा को साथ समय बिताने को कहा। अब छात्रा सदमे से बाहर आ चुकी है।
डिप्रेशन के लक्षण
● सुबह के समय अधिक उदास रहना, बात-बात पर गुस्सा करना
● थकावट व कमजोरी महसूस करना
● खुद को हर चीज के लिए दोषी मानना
● नींद का न आना व ज्यादा सोना
● बार-बार आत्महत्या के विचार आना
● बैचैनी होना, दिल की धड़कन का तेज होना
यूं संभालें अपने आप को
● कमरे में अकेले न पड़े रहें।
● परिवार के लोगों, अच्छे-सच्चे दोस्तों से दूरी न बनाएं।
● मनोचिकित्सक से परामर्श लें।
● अपनी पसंद की चीजें करें। परिवार व दोस्तों के साथ घूमें।
● जो काम लंबे समय से अटके पड़े हैं तो उसे पूरा करने की ओर ध्यान लगा सकते हैं।
● ब्रेकअप होने के बाद दोबारा उन चीजों में ध्यान लगाएं, जिसमें पहले मन लगता हो।
● संभव हो तो कुछ दिन के लिए दूसरे शहर चले जाएं। जैसे रिश्तेदार के घर व हिल स्टेशन पर जा सकते हैं।