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पुरी मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर विचार करें राज्य सरकार व मंदिर समिति-सुप्रीमकोर्ट

कोर्ट के संज्ञान में यह बात लाई गई थी कि भारी संख्या में विदेशों और देश के गैर हिंदू समुदाय के लोग श्रीजगन्नाथ मंदिर की भव्यता और इसकी ऐतिहासिकता के साथ ही महाप्रभु की रीतिनीति व मंदिर निर्माण की स्थापत्यकला पर जानकारी चाहते हैं...

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महेश शर्मा की रिपोर्ट...

(भुवनेश्वर): सुप्रीमकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी है कि राज्य सरकार और श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन व संचालन से जुड़ी समितियां यह संभावना तलाशें कि गैर हिंदू भी यदि श्रीमंदिर देखना चाहे, तो उन्हें अनुमति दी जाए। कोर्ट के संज्ञान में यह बात लाई गई थी कि भारी संख्या में विदेशों और देश के गैर हिंदू समुदाय के लोग श्रीजगन्नाथ मंदिर की भव्यता और इसकी ऐतिहासिकता के साथ ही महाप्रभु की रीतिनीति व मंदिर निर्माण की स्थापत्यकला पर जानकारी चाहते हैं। उनकी उत्सकुता स्वाभाविक है। पर गैर हिंदू होने के कारण उन्हें जाने नहीं दिया जाता।

जिला जज की रिपोर्ट पर अमल करें

सुप्रीमकोर्ट ने सुझाव दिया है कि ऐसी संभावना तलाशी जानी चाहिए कि श्रीमंदिर में गैर हिंदुओं को भी प्रवेश दिया जाए। सुप्रीमकोर्ट में इस जनहित याचिका की सुनवाई जस्टिस आदर्श कुमार गोयल व जस्टिस एस.अब्दुल नजीर की खंडपीठ ने की। इसमें पंडों की मनमानी का भी मुद्दा उठाया गया था। कोर्ट ने कहा कि जिलाजज ने मंदिर प्रबंधन में सुधार के लिए जो सिफारिशें की हैं, उन्हें लागू किया जाए। यह भी कहा कि यदि जिला जज की रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार को कोई आपत्ति है तो अपनी आपत्ति दर्ज कराए। जिन मंदिरों में गैरहिंदुओं को जाने की इजाजत नहीं है, उनमें ओडिशा के दो मंदिर हैं। पहला पुरी का जगन्नाथ मंदिर व दूसरा भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर।


ओडिशा के इन मंदिरों में नहीं है गैरहिंदुओं को जाने की इजाजत

ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में केवल परंपरागत हिंदुओं के प्रवेश की अनुमति है। यह मंदिर हिंदुओं की आस्‍था का प्रमुख केंद्र है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को इस आधार पर यहां पर दर्शन करने से रोक दिया गया था कि उनके पति पारसी थे। इसी तरह की कई अन्य घटनाएं यहां हो चुकी हैं।

लिंगराज मंदिर ओडिशा आने वालों के लिए पसंदीदा ठिकाना है। यहां करीब छह हजार लोग प्रतिदिन आते हैं। वर्ष 2012 में यहां पर एक रुसी पर्यटक ने प्रवेश कर बवाल मचा दिया था। इसके बाद मंदिर परिसर को शुद्ध किया गया। अशुद्ध हो जाने से 50 हजार रुपए का प्रसाद फेंक दिया गया ।

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