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मौसी के घर विराजे जगन्नाथ महाप्रभु,दर्शन के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़

रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ साल में एक बार अपने भाई और बहन के साथ मौसी के घर जाते हैं...

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jagarnath mahaprabhu

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महेश शर्मा की रिपोर्ट...

(पुरी) महाप्रभु जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र व बहन देवी सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर स्थित अपनी मौसी के घर में स्थापित कर दिए गए हैं। भक्तों को महाप्रसाद ग्रहण करने का अवसर मिला। मौसी के घर पर भगवान की सेवाश्रूषा में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। गुंडिचा मंदिर को भगवान की मौसी का घर माना जाता है।

रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ साल में एक बार अपने भाई और बहन के साथ मौसी के घर जाते हैं। जहां पर वह एक हफ्ते तक रहते हैं। उन्हें तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवानों का भोग लगाया जाता है। वही प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। स्वादिष्ट पकवान खाकर जब वह अस्वस्थ हो जाते हैं तो फिर उन्हें पथ्य का भोग लगाया जाता है। वे शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं। गुंडिचा में उनके दर्शन को आइप दर्शन कहा जाता है। जगन्नाथ जी के प्रसाद को महाप्रसाद कहा जाता है। इन दिनों भक्तों में नारियल, लाई, गजामूंग और मालपुए का प्रसाद वितरित किया जाता है। उनकी श्रीमंदिर में वापसी भी उसी धूमधाम से होती है जिस धूमधाम से उन्हें ले जाया जाता है।

इस वजह से मौसी के घर देरी से पहुंचे महाप्रभु

बता दें कि शनिवार को जगन्नाथ महप्रभु, बहन देवी सुभद्रा और भाई बालभद्र के रथ पुरी से अपनी मौसी के घर के लिए रवाना हुए थे। भक्तों ने रस्सों से रथों को खेचा था। शनिवार देर रात गुंडिचा से लगभग एक किलोमीटर दूर बलगंडी चौक के पास बने एक अस्थायी सूचना केंद्र से महाप्रभु का रथ टकरा गया था। इस वजह से जगन्नाथ महाप्रभु रात भर वहीं अटके रहे। जबकि देवी सुभद्रा और बालभद्र का रथ रात को ही गुंडिचा पहुंच गया था। महाप्रभु के रथ को निकालने के लिए एक पेड की शाखाएं काटनी पड़ी तब जाकर रथ निकल पाया और रविवार गयारह बजे के आसपास उनका रथ गुंडिचा पहुंचा। गुंडिचा में जगन्नाथ महाप्रभु की मौसी का घर है।

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