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आदिवासी बोले- जल, जंगल और जमीन नहीं छोड़ेंगे, आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे

इस मामले पर कोर्ट पुनर्विचार करेगा।

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CG News

आदिवासी बोले- जल, जंगल और जमीन नहीं छोड़ेंगे, आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे

जगदलपुर. केंद्र सरकार की रिपोर्ट के आधार पर वन भूमि पर वर्षों से काबिज आदिवासियों को जुलाई 2019 तक बेदखल करने का आदेश हुआ था। फिलहाल इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की खंडपीठ ने रोक लगा रखी है। इस मामले पर कोर्ट पुनर्विचार करेगा।

शुक्रवार को सर्व आदिवासी समाज की संभागीय इकाई के बैनर तले हजारों आदिवासियों ने वन अधिकार पट्टा निरस्त किए जाने के विरोध में शहर में रैली निकाली। हाता ग्राउंड से शुरू हुई रैली कलक्टोरेट पहुंचकर खत्म हुई। यहां समाज के प्रतिनिधिमंडल ने कलक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले में न्याय करने की गुहार लगाई। इसके बाद रैली वापस हाता ग्राउंड पहुंची। यहां हुई सभा में सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि हम जल-जंगल और जमीन नहीं छोड़ेंगे, अपने हक के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगे।

ठाकुर ने कहा कि पूरे प्रदेश में 1 लाख से अधिक वन अधिकार पट्टे निरस्त किए गए हैं, जिनकी बेदखली की कार्रवाई पर फिलहाल स्टे लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने सही तथ्य रखे। प्रदर्शन और रैली में सात ब्लॉक के सामाजिक लोगों के साथ ही प्रमुख रूप सेभोलाराम मरकाम, रुक्मणी कर्मा, बलदेव बघेल आदि मौजूद थे।

पारंपरिक परिधान में कुल्हाड़ी लेकर शामिल हुए
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हाता ग्राउंड से रैली की शुरुआत हुई। इसमें प्रथम चार पंक्ति में युवाओं की टोली थी। सभी ने पारंपरिक परिधान पहन रखे थे। उनके कंधे पर कुल्हाड़ी थी। समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि इसके जरिए उन्होंने शहर के लोगों को आदिवासी संस्कृति से परिचय करवाया। रैली के दौरान आदिवासी समाज के लोग वन अधिकार पट्टा निरस्त किए जाने के विरोध में नारे लगाते रहे।