
बिजनौर। केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से जहां नरेंद्र मोदी ने साल 2019 तक सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का वायदा किया तो वहीं पीएम मोदी के इस वायदे को लेकर खुद सरकारी विभाग के अधिकारी ही उनकी योजनाओं पर डाका डाने लगे है। हालांकि पीएम के इस योजना को लेकर बिजली विभागों के कार्यो में काफी बदलाव किया गया है। जिससे बिजली चोरी की समस्या के साथ साथ बिजली के जर्जर तारों को भी बदलने का काम जोर शोर से चल रहा है। उधर सरकारी विभागों पर बकाया करोड़ों रुपये के भुगतान को भी बिजली विभाग द्वारा अब वसूला जाना है। इसी कड़ी में बिजनौर जनपद में तकरीबन 15 करोड़ रुपया का भुगतान सरकारी विभागों और सरकारी आवासों में अभी भी बकाया बताया जा रहा है। जो कि अपने आप में चौका देने वाली बात है।
क्या है मामला ?
बता दें कि प्रदेश सरकार की पहल पर जल्द ही सभी सरकारी विभागों में अब प्रीपेड मीटर लगाए जाने है।इन प्रीपेड मीटर से विभाग उतनी ही बिजली खर्च कर सकेंगे जितना की प्रीपेड मीटर में रिचार्ज कराया जायेगा। इसी कड़ी में बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता रणजीत सिंह यादव ने बताया की बिजनौर जनपद में तकरीबन सभी सरकारी विभागों पर 15 करोड़ रुपया बकाया है।इन रुपयों को विभागों द्वारा वसूला भी जा रहा है।
किस विभाग पर कितना बकाया?
जानकारी के मुताबिक जनपद बिजनौर में सबसे ज्यादा बिजली का बकाया है शिक्षा विभाग पर 10 करोड़ से ज्यादा है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग पर तकरीबन 2 करोड़ का बकाया है। वहीं पुलिस विभाग पर भी करीब-करीब 99 लाख रुपये का बकाया है। दूसरी ओर जिला प्रशासन पर 26 लाख और सिंचाई विभाग पर 25 लाख रुपया सबसे ज्यादा बकाया है।
खैर भले ही प्रदेश सरकार बिजली विभाग को लेकर लाख दावे करे। लेकिन ये सरकारी विभाग ही बिजली का भुगतान न देकर प्रदेश सरकार के बिजली मुहिम को कही न कही पलीता लगा रहे है। जिससे न केवल सरकार को बल्कि केंद्र की योजनाओं को भी भारी नुकसान हो रहा है।
Published on:
21 Dec 2017 11:31 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
