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यूपी के कई जिलों में नकली चांदी का कारोबार, ऐसे हो रहा सेहत से खिलवाड़ का खेल

यूपी के कई जिलों में नकली चांदी के वर्क का रैकेट चल रहा है। नकली चांदी वर्क को बनाने में एल्युमीनियम और स्टील जैसी धातुओं का इस्तेमाल होता है। इससे कई गंभीर रोग हो सकते हैं।

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मिठाइयों, पान और आयुर्वेदिक दवाइयों पर लगने वाला चांदी का वर्क या सिल्वर फॉयल इनका सदियों पुराना हिस्सा रहा है। हालांकि अब यूपी के कई जिलों में नकली चांदी वर्क बनाने का काम हो रहा है। असली चांदी की तरह चमकने वाले ये चांदी वर्क स्टील और एल्युमीनियम की छोटी-छोटी लेयर्स से तैयार की जा रही है।

नकली चांदी वर्क का ये रैकेट अमरोहा, बिजनौर, अमरोहा और सम्भल जैसे जिलों में बड़े लेवल पर चल रहा है। हैरानी की बात तो ये है कि स्थानीय प्रशासन को सारी जानकारी है फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।

इस तरह बनता है असली चांदी वर्क

बिजनौर के नगीना, नजीबाबाद, धामपुर, कस्बों में करीब 50 घरों में रोज लाखों रूपए का नकली सिल्वर वर्क तैयार होता है। दरअसल असली चांदी वर्क तैयार करने में स्क्वायर आकार के रंगीन ट्रेसिंग पेपर की गड्डी में चांदी के बारीक तार के टुकड़ों को चमड़े के थैले में रखकर हथौड़े से जमकर पीटा जाता है। इससे तार महीन होकर फैल जाता है। चमड़े के इस थैले को ‘औजार’ कहा जाता है।

जानिए कैसे तैयार हो रहा है नकली चांदी वर्क
नकली चांदी वर्क या सिल्वर फॉयल को तैयार करने में स्टील या एल्युमीनियम के पतरे के टुकड़े कर लिए जाते हैं। इसके बाद इन्हें औजार यानी चमड़े की थैली में रख के हथौड़े से कूटा जाता है। जब ये परत महीन हो जाती है और नकली चांदी का वर्क तैयार हो जाता है।

खास बात है कि असली चांदी और एल्युमीनियम या स्टील से बने नकली सिल्वर फॉयल को सिर्फ देखकर अंतर बता पाना मुश्किल है। इससे मार्किट में असली और नकली चांदी वर्क में अंतर कर पाना मुश्किल है।

घर-घर में हो रहा नकली चांदी का काम
बिजनौर, अमरोहा और सम्भल जैसे जिलों के सैंकड़ों घरों में ये चांदी वर्क बनाए जाते हैं। यहां से तैयार हुआ नकली चांदी वर्क प्रदेश के अन्य जिलों और देश के अन्य राज्यों में सप्लाई किया जाता है।

नकली चांदी वर्क से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां
चांदी वर्क का इस्तेमाल पान, तम्बाकू मसाला, आयुर्वेदिक दवाइयां, जर्दा पर लगाने से लेकर अन्य कई कामों में होता है। हालांकि अगर ये नकली चांदी वर्क से आपको गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। स्टील या एल्युमीनियम से बने नकली चांदी के लगातार इस्तेमाल से आपको एसिडिटी, अल्सर, पेट और आंत से जुड़े रोग हो सकते हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार स्टील और एल्युमीनियम मेटल हैं और इससे बने वर्क को पचाने में दिक्कत होती है। इससे शरीर में टॉक्सिक पार्टिकल्स जमा हो जाते हैं। शरीर टॉक्सिक हो जाता है और आगे चलकर गले में इन्फेक्शन, कैंसर जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।

ऐसे करें नकली और असली चांदी वर्क में अंतर

असली और नकली चांदी के वर्क की पहचान इन तरीकों से की जा सकती हैं-

- मिठाई के ऊपर लगे चांदी वर्क को पोंछने पर यदि ये उंगलियों पर चिपक जाए तो समझ जाइए ये नकली है। लेकिन अगर न चिपके तो चांदी का वर्क असली है।

- चांदी का नकली वर्क थोड़ा मोटा होता है जबकि असली वर्क बारीक होता है। इस अंतर को समझना सबसे जरूरी है।

- चांदी के वर्क को निकालकर इसे गर्म कर लें। अगर ये चिपककर गोल आकर सा बन जाए तो असली होगा लेकिन नकली होने पर यह काला होने लगेगा।

-चांदी के वर्क को अपने हथेलियों के बीच में रगड़ें। अगर यह असली होगा तो रगड़ने पर यह गायब हो जाएगा। जबकि नकली वर्क छोटे गोले जैसा बन जाएगा।