
ट्रैक्टर ट्रोली में भरी थी 10 टन बजरी
अनाधिकृत टैक्टर ट्रोलियों पर नहीं हो रही कार्रवाई
बजरी माफिया और प्रशासनिक अधिकारियों की सांठगांठ का अंदेशा
बीकानेर.
राजमार्गों पर बजरी माफियाओं के वाहनों को जिम्मेदार अधिकारियों ने खुली छूट दे रखी है। यकीन नहीं होता तो नयाशहर थाने में खड़े टै्रक्टर को देख लीजिए। इसके पीछे लगी ट्रोली में करीब दस टन बजरी भरी हुई है। जबकि इतनी क्षमता की बजरी छह पहिया डंपर में भरी जाती है। दस टन भरी बजरी से भरे इसी ट्रैक्टर ने बुधवार को करमीसर फांटा पर पैदल चल रहे बारातियों को रौंदते हुए आगे बढ़ गया था। हादसे में तीन महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं कुछ लोग घायल हो गए थे। अधिकारियों और बजरी माफियाओं की साठगांठ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। तीन दिन बाद भी सड़कों पर ओवरलोड डंपर और ट्रैक्टर ट्रोलियां बजरी भरकर बेलगाम दौड़ रही है।
नहीं करते ऑफ लोड
जानकारों की मानें तो बजरी माफियाओं पर संबंधित पुलिस थाना, परिवहन और खनिज विभाग के अधिकारी महज खानापूर्ति कर रहे हैं। ओवरलोड बजरी के वाहन पकड़े जाने की स्थिति में वे जुर्माना लेकर उन वाहनों को छोड़ देते हैं, जबकि उच्च न्यायालय के आदेशानुसार उन्हें ऑफ लोड करना होता है। बजरी कारोबार से जुड़े व्यापारियों की मानें तो छह पहिया डंपर में 11 टन, दस पहिया में 16 तथा 22 पहिया ट्रक में करीब 55 टन बजरी का परिवहन किया जा सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि कोई भी वाहन चालक निर्धारित क्षमता में वाहनों का परिवहन नहीं कर रहा। प्रशासनिक अनदेखी के चलते निर्धारित अवधि से दोगुना या डेढ़ गुणा माल भरकर परिवहन किया जा रहा है।
दुर्घटना का बड़ा कारण
यातायात सलाहकार समिति से जुड़े हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि ओवरलोड वाहन दुर्घटना का बड़ा कारण है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अनदेखी के चलते सड़कों पर बेरोकटोक वाहन दौड़ रहे हैं।
Published on:
29 Feb 2020 11:42 am
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