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183 दिन में खोजे 125 मोबाइल, कीमत 40 लाख

548 दिनों में 225 मोबाइल आमजन को वापस लौटाए - पुलिस का विशेष अभियान फिर से खुशी

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183 दिन में खोजे 125 मोबाइल, कीमत 40 लाख

183 दिन में खोजे 125 मोबाइल, कीमत 40 लाख

बीकानेर. आमजन की गाढ़ी कमाई से खरीदे गए मोबाइल फोन को ढूंढने में पुलिस ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया है। 183 दिनों की मेहनत से पुलिस ने 200 गुम हुए मोबाइल फोनों में से 125 फिर से खोज निकाले हैं। अब यह मोबाइल उनके असली मालिकों को सौंप दिए गए हैं।

पुलिस ने इस अभियान को Òफिर से खुशीÓ नाम दिया है। यह जानकारी पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौमत ने प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने कहा कि मोबाइल मिलने की उम्मीद खो चुके लोगों को जब मोबाइल मिले, तो चेहरे पर मुस्कान लौट आई। इसी लिए यह नाम दिया गया है। बरामद मोबाइल फोनों की कीमत करीब 40 लाख रुपए है।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि शहर में मोबाइल मोबाइल गुम होने की पुलिस पोर्टल पर सैकड़ों शिकायतें दर्ज हो रही थीं। मजदूर व गरीब लोगों के मोबाइल, जिन्होंने किस्तों पर लिए थे, उनके मोबाइल गुम हुए थे। इनकी बरामदगी के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) हरीशंकर के नेतृत्व में साइबर सेल को अलर्ट कर मिशन फिर से खुशी चलाया गया।

साइबर सेल के हवलदार दीपक यादव के नेतृत्व में हवलदार दिलीपसिंह, सिपाही श्रीराम, महेन्द्र, राजूराम, बाबूलाल, गोविंद, देवेन्द्र, सूर्यप्रकाश की टीम बनाई गई। टीम ने करीब 45 दिन कड़ी मेहनत कर सवा साल में विभिन्न थानों में दर्ज 200 मोबाइल फोनों की गुमशुदगी में से 125 को ढूंढ निकाला। इन मोबाइलों में 7 मोबाइल ऐसे हैं, जो दूसरे राज्य के लोगों के हैं।


दूसरी बार लौटाई खुशी
पुलिस ने पहली बार 15 सितंबर को 100 लोगों को मोबाइल ढूंढ कर दिए थे। अब 125 मोबाइल ढूंढ निकाले। पुलिस की मानें तो पिछले 548 दिनों में जिलेभर में 340 मोबाइल गुमशुदगी की शिकायत मिली थीं, जिसमें से 225 को ढूंढ कर उनके मालिकों को सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस का फिर से खुशी अभियान जारी रहेगा।

ऐसे ट्रेस हुए मोबाइल

- पीडि़तों ने राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर ऑनलाइन गुमशुदगी दर्ज कराई।

- पुलिस आईएमईआई नंबरों को सर्विलांस पर डालती है।
- आईएमईआई नंबर एक्टिव होते ही पुलिस को सिग्नल मिल जाता है।

- मोबाइल में जो व्यक्ति सिम डालता है, उसकी पूरी डिटेल पुलिस को मिल जाती है।
- डिटेल व मोबाइल नंबर मिलने पर पुलिस संबंधित व्यक्ति से संपर्क कर मोबाइल प्राप्त करती है।

मोबाइल गुम होने पर यह करें
- संबंधित थाने या राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर ऑनलाइन गुमशुदगी दर्ज कराएं।

- गुमशुदगी की हार्डकॉपी पुलिस अधीक्षक कार्यालय की साइबर सेल में जमा करवाएं।
- मोबाइल में डाली अपनी सिम को तुरंत बंद करवा देंं।

- मोबाइल की पूरी डिटेल पुलिस को मुहैया करवाएं।


फोन ऑन होते ही लॉकेशन ट्रेस

जिस व्यक्ति को सड़क पर या अन्य किसी स्थान पर मोबाइल मिला, उसने वह मोबाइल दो-ढाई महीने तक ऑन ही नहीं किया। बाद में उसका उपयोग करना शुरू कर दिया। पुलिस ने गुम हुए मोबाइलों को सर्विलांस पर डाल रखा था।

मोबाइल स्विच ऑन होते ही लोकेशन ट्रेस हो गई। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन व सिम के नंबर व सिम जिसके नाम से थी, उससे संपर्क करना शुरू किया। ऐसे करते-करते पुलिस ने गुम हुए 200 में से 125 मोबाइलों को ढूंढ निकाला।

- दीपक यादव, हवलदार साइबर सेल


कानूनी पचड़े से बचे आमजन
किसी व्यक्ति को मोबाइल, लैपटॉप व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम लावारिस मिले, तो वह संबंधित थाने को सौंप दे। ऐसे मोबाइल व लैपटॉप को अपने पास रखना कानून अपराध है। चोरी व गुम होने वाले मोबाइल व लैपटॉप पुलिस की सर्विलांस में रहते हैं।

हरीशंकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर

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