
आध्यात्मिक ज्ञान से जीवन में सुधार: आचार्य महाश्रमण
लूणकरनसर. तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण ने बुधवार सुबह लूणकरनसर में दो दिवसीय प्रवास के बाद धवल सेना के साथ अङ्क्षहसा पदयात्रा के दौरान विहार किया। इस दौरान बड़ी तादाद में श्रावक-श्राविकाओं ने ढाणी भोपालाराम के प्रवास स्थल तक साथ पहुंचे।
ढाणी भोपालाराम के राजकीय विद्यालय में प्रवचन देते हुए आचार्य महाश्रमण ने कहा कि ज्ञान और आचार ये दोनों तत्व एक-दूसरे से जुड़े हैं। आचरण को सही रखने के लिए सही ज्ञान भी अपेक्षित है। ज्ञानविहीन आचरण है या आचरण विहीन ज्ञान है तो मानना चाहिए कि कुछ कमी है। उन्होंने कहा कि अगर सम्यक् ज्ञान होता है तो कार्य भी सही तरीके से हो सकता है। आचार्य महाश्रमण ने एक संस्कृत श्लोक की व्याख्या करते हुए कहा कि ज्ञान का सार आचार है। जिस ज्ञान से वैराग्य बढ़े, जिससे व्यक्ति के भीतर मैत्री भाव उभरे, वह कल्याणकारी कार्य करे ऐसा ज्ञान सारभूत होता है जो उपयोगी व श्रेयस्कर हो। उसे ग्रहण अवश्य करें। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न तरह की शिक्षाएं दी जाती है। सभी के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी रहे, तो जीवन बढिय़ा बन सकता है।
इस मौके पर आचार्यश्री ने ग्रामीणों को अङ्क्षहसा, नशामुक्ति व नैतिकता का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में लूणकरनसर प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष हंसराज बरडिय़ा, श्रेयांस बैद, जगदीश आदि ने विचार रखे। जैन विश्व भारती लाडनूं द्वारा शासनश्री मुनि सुखलाल की नवीन कृति ङ्क्षचतन महावीर का एवं सच्चे बच्चे पूज्य चरणों में उपह्रत कर लोकार्पित की गई। यहां से विहार कर आचार्य महाश्रमण रास्ते में ढाणी भोपालाराम की श्रीकृष्ण गोशाला में पहुंचे। यहां पोषित गोवंश के बारे में जानकारी लेते हुए गोसेवा के कार्य की सराहना की तथा अङ्क्षहसा परमो धर्म का उपदेश दिया।
आचार्य कन्या सुरक्षा सर्किल पहुंचे
विहार के दौरान आचार्य महाश्रमण बालिका विद्यालय के सामने नवनिर्मित आचार्य महाश्रमण कन्या सुरक्षा सर्किल पहुंचे। रास्ते में आचार्यश्री के दर्शन के वरिष्ठजनों व रोगी भी पहुंचे। मुनिवर ने मंगलपाठ कर दीर्घ जीवन की कामना की।
Published on:
26 May 2022 01:28 am
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