
अभिलेखों से प्रदर्शित होगा 1857 की क्रांति में राजपूताना का योगदान
भारतीय स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम 1857 की क्रांति में राजपूताना की विभिन्न रियासतों के स्वाधीनता सेनानियों की अहम भूमिका रही। राजपूताना की तत्कालीन रियासतों में 1857 की क्रांति के दौरान रहे योगदान से संबंधित दस्तावेजों की अभिलेख प्रदर्शनी राजस्थान राज्य अभिलेखागार बीकानेर में प्रदर्शित की जाएगी।
4 मार्च से प्रारंभ हो रहे अभिलेख सप्ताह के तहत आमजन, शोधार्थी और विद्यार्थी इस प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकेंगे। इस प्रदर्शनी में 1857 की क्रांति के दौरान राजपूताना रियासतों के योगदान से संबंधित 48 अभिलेखीय दस्तावेजों और फोटो को प्रदर्शित किया गया है।
राजस्थान राज्य अभिलेखागार बीकानेर के निदेशक डॉ. नितिन गोयल के अनुसार, सन 1857 की क्रांति में राजपूताना रियासतों के योगदान संबंधित प्रदर्शनी में विभिन्न रियासतों की बहियों, आदेशों, फोटो इत्यादि को प्रदर्शित किया गया है।
इनमें कागद बही बीकानेर, हकीकत बही जोधपुर, कोटा राज्य बही लक्ष्मीनारायण का भण्डार, नसीराबाद छावनी में विद्रोह, सनद परवाना बही जोधपुर, सावा बही सरदारगढ़, सावा बही सूरतगढ़, सुगाली माता का चित्र, अंग्रेजों से विद्रोह के समय बीकानेर रियासत में सूरतगढ़ परवाने के खेड़ा का व्यय विवरण, ऊंटों की खरीद, आउवा ठिकाना सहित अनेक रियासतों के अभिलेखीय दस्तावेज प्रदर्शित किए गए हैं।
इस देवी के दस सिर व 54 हाथ
आउवा की कुलदेवी सुगाली माता मारवाड़ क्षेत्र की आराध्य देवी हैं। तीन फीट साढ़े आठ इंच लंबी और दो फीट पांच इंच चौड़ी इस देवी प्रतिमा के दस सिर और 54 हाथ हैं। काले पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा सन् 1857 के स्वाधीनता संग्राम में स्वाधीनता सेनानियों की प्रेरणा स्त्रोत रही है। प्रदर्शनी में प्रदर्शित जानकारी व फोटो के अनुसार स्वतंत्रता सेनानी सुगाली माता का दर्शन करके ही अपनी गतिविधियां प्रारंभ करते थे।
Published on:
04 Mar 2024 06:30 pm

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