
सात दिन में उगाओ 'हथेली पर सरसो'
सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए 'ऑथेन्टिकेशन स्टूडेंट जनाधार मॉड्यूल' के जरिये उनका प्रमाणीकरण किया जाएगा। इसमें घर के मुखिया का जनाधार तथा बच्चे की सारी जानकारी अपडेट की जा रही है। इस संबंध में शिक्षा निदेशक गौरव अग्रवाल ने 9 मई को एक आदेश भी जारी किया था। इस आदेश में बच्चे की सारी जानकारी जुटा कर अपडेट करने के लिए 17 मई की तिथि निर्धारित की गई थी।
आंकड़े बताते हैं कि कक्षा एक से 12वीं तक पूरे राजस्थान में करीब 95 लाख बच्चे हैं, जिनका 'ऑथेन्टिकेशन' होना है। व्यावहारिक तथ्य यह है कि जो समयावधि (9 से 17 मई ) इस कार्य को संपादित करने के लिए दी गई थी, उस दौरान तमाम शिक्षण कार्यों मसलन परीक्षा, परिणाम की तैयारी आदि में शिक्षक मशगूल रहे। दूसरी ओर 11 मई से स्कूलों में अवकाश का ऐलान कर दिया गया, जिससे भी प्रमाणीकरण का कार्य बाधित हुआ। एक अनुमान के मुताबिक, निदेशालय की ओर से दी गई समयावधि के दौरान लगभग 30 फीसदी ही बच्चों का जनआधार प्रमाणीकरण का कार्य पूर्ण हो पाया है। ऐसे में एक तरफ तो शिक्षकों को कार्रवाई का डर सता रहा है, तो दूसरी ओर जनआधार प्रमाणीकरण नहीं हो पाने से तमाम लाभों से बच्चे वंचित हो जाएंगे, जो उन्हें सरकारी योजनाओं के रूप में मिलते हैं।
कैसे क्या होगा
निदेशक अग्रवाल ने आदेश में कहा था कि विद्यालय के संस्था प्रधान तथा कक्षाध्यापक के स्टाफ ङ्क्षवडो लॉगिन पर यह मॉड्यूल उपलब्ध कराया जाएगा। डेटा में असमानता होने पर जन आधार प्रमाणीकरण असफल होता है, तो कक्षाध्यापक विद्यालय अभिलेख एवं शाला दर्पण में दर्ज प्रविष्टियों से मिलान करेगा। सही होने पर जन आधार डेटा को शाला दर्पण पोर्टल के आधार पर अद्यतन करने के लिए अभिभावक से जन आधार की छाया प्रति एवं सहमति पत्र प्राप्त करेगा। जन आधार प्रमाणीकरण से संबंधित दस्तावेज विद्यालय अभिलेख के रूप में सुरक्षित भी रखना होगा।
ज्यादा दिक्कत प्राथमिक में
जानकारों की मानें, तो रोजगार सहित विभिन्न कारणों से दूसरे राज्यों से आकर बसने वाले लोगों के बच्चों का जनआधार प्रमाणीकरण का काम सबसे मुश्किल है। एक अनुमान के मुताबिक प्राथमिक स्तर यानी कक्षा एक से पांचवीं तक में पढऩे वाले लगभग 50 फीसदी बच्चों का जनआधार कार्ड ही नहीं बन पाया है। वजह तकनीकी पेचीदिगियां हैं। इनसे भी शिक्षकों को ही जूझना होगा।
शिक्षक संगठनों का विरोध
राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के प्रदेश महामंत्री अरविन्द व्यास तथा शिक्षक नेता रवि आचार्य ने शिक्षा मंत्री को पत्र भेज कर कहा है कि स्कूलों में ग्रीष्मावकाश होने के कारण कई विद्यार्थी अभिभावकों के साथ कहीं चले गए हैं। ऐसे में जनाधार को अपटेड करने में मुश्किल हो रही है। जानकारी के मुताबिक, पत्र में यह भी कहा गया है कि 17 मई तक परीक्षाएं व मूल्यांकन काम भी चलने से यह काम करना मुश्किल हो रहा है, लिहाजा उसमें कुछ शिथिलता प्रदान की जाए।
अब कहां ढूंढें अभिभावकों को
शिक्षा निदेशक गौरव अग्रवाल ने जनाधार को अपडेट करने के लिए 17 मई अंतिम तिथि निर्धारित की थी। लेकिन किसी भी स्कूल के संस्था प्रधान तथा अन्य शिक्षकों को इसके लिए समय नहीं मिल पाया। वजह स्कूलों में जिला समान परीक्षा शुरू हो गई थी, तो स्टाफ उस में लग गया। 16 मई तक परीक्षा परिणाम जारी करने को कहा गया। पांचवीं और आठवीं बोर्ड परीक्षा भी मैराथन की तरह चली, जो 17 मई को समाप्त हुई है। इसके अलावा प्रचंड गर्मी के चलते निदेशक ने 11 मई से सत्रांत तक स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया। ऐसे में अभिभावक तथा बच्चों को जनाधार अपडेट के बारे में जानकारी भी नहीं दी जा सकी। अब कई जिलों के शिक्षा अधिकारी 17 मई तक जनाधार को अपडेट करने के आदेश जारी कर रहे हैं। व्यावहारिक तथ्य यह है कि इतने कम समय में अभियान की शक्ल वाला यह कार्य हो पाना संभव नहीं लग रहा है। आदेश में यह भी कहा जा रहा है कि अगर समय पर यह काम पूरा नहीं किया गया तो कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। कार्रवाई की यही चेतावनी शिक्षकों में डर पैदा कर रही है।
Published on:
18 May 2022 06:40 pm
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