scriptbikaner - bikaner nagar migam | मानदेय व भत्तों पर 80 लाख रुपए खर्च, जनसमस्याओं पर चर्चा एक बार भी नहीं | Patrika News

मानदेय व भत्तों पर 80 लाख रुपए खर्च, जनसमस्याओं पर चर्चा एक बार भी नहीं

शहर की सरकार - दो साल में 79 निर्वाचित पार्षदों का मानदेय बना 71 लाख रुपए

महापौर के बने है मानदेय व भत्ते के 8.40 लाख रुपए

24 महीनों में सभी पार्षदों ने एक बार भी सदन में जनसमस्याओं पर नहीं की है चर्चा

बीकानेर

Published: November 17, 2021 06:14:48 pm

विमल छंगाणी- बीकानेर. शहर की सरकार में महापौर और पार्षदों पर हर महीने मानदेय और भत्ते के नाम पर लाखों रुपए खर्च हो रहे है। नगर निगम वर्तमान बोर्ड गठन के करीब दो साल में 79 पार्षदों को मानदेय भुगतान पर 70 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च कर चुका है जबकि महापौर सहित सभी पार्षदों ने एक बार भी सदन में बैठक कर आमजन की जनसमस्याओं पर चर्चा तक नहीं की है। जनता से चुनकर आए पार्षद सदन में पहुंचने के बाद जनता को ही भूल गए है। हर महीने मानदेय प्राप्त कर रहे हैं लेकिन जनता को रही समस्याओं व परेशानियों पर सदन में न चर्चा कर रहे हैं और ना ही महापौर साधारण सभा की बैठक बुला रही है।

मानदेय व भत्तों पर 80 लाख रुपए खर्च, जनसमस्याओं पर चर्चा एक बार भी नहीं
मानदेय व भत्तों पर 80 लाख रुपए खर्च, जनसमस्याओं पर चर्चा एक बार भी नहीं

2.96 लाख रुपए निर्वाचित पार्षदों का प्रतिमाह मानदेय

नगर निगम शहर के 79 निर्वाचित पार्षदों को हर महीने प्रति पार्षद 3750 रुपए प्रतिमाह के अनुसार 2 लाख 96 हजार 250 रुपए मानदेय का भुगतान कर रहा है। दो साल में निर्वाचित 79 पार्षदों का मासिक मानदेय का कुल भुगतान 71 लाख 10 हजार रुपए बनता है। वहीं निगम में 12 मनोनीत पार्षद भी है। इनका प्रतिमाह मानदेय 45 हजार रुपए होता है। छह माह में निगम ने 2 लाख 70 हजार रुपए मानदेय भुगतान बनाया है। निगम पार्षदों के मानदेय पर 73 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च कर चुका है।

महापौर को मिल रहे हर माह 35 हजार रुपए

नगर निगम प्रति माह मानदेय के रूप में निगम महापौर को मानदेय व लघु पेयजल बिल आदि के भुगतान के रूप में प्रतिमाह कुल 35 हजार रुपए का भुगतान दिया जा रहा है। इनमें 20 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय राशि है,जबकि 15 हजार रुपए लघु पेयजल बिल आदि के रूप में राशि दी जा रही है। बताया जा रहा है कि दो साल में प्रति माह 20 हजार रुपए मानदेय के अनुसार 4.80 लाख रुपए मानदेय तथा 15 हजार रुपए लघु पेयजल बिल आदि के भुगतान के रूप में दो साल का 3.60 लाख रुपए की राशि बनती है।

दो साल तीन बैठक, जनसमस्याओं पर चर्चा एक बार भी नहीं

नगर निगम के वर्तमान बोर्ड गठन को दो साल हो रहे है। दो साल में बोर्ड की महज तीन साधारण सभा की बैठकें हुई है। इनमें दो बैठकें केवल निगम बजट से संबंधित रही है। एक बैठक में निगम कमेटियो सहित अन्य प्रस्ताव प्रस्तावित थे, लेकिन बैठक शुरू होते ही हुए हंगामें की भेंट यह बैठक चढ़ गई। इसमें शहर की जनसमस्याओं पर चर्चा नहीं हुई। नगर निगम के निर्वाचित पार्षदों सहित मनोनीत पार्षदों ने अब तक एक बार भी सदन में शहर की सफाई, प्रकाश, बेसहारा पशु,नाले -नालियां, निर्माण और विकास कार्य आदि पर पार्षदों ने चर्चा तक नहीं की है। जबकि निगम हर माह महापौर और पार्षदों के मानदेय पर लाखो रुपए खर्च कर रहा है।

दो माह का प्रावधान,नौ माह बाद भी नहीं

नगर निगम की साधारण सभा प्रत्येक दो माह बाद आहूत करने का प्रावधान है। निगम में इसी साल फरवरी में हुई बजट बैठक के बाद साधारण सभा नहीं बुलाई गई है। नौ महीनों बाद भी साधारण सभा नहीं बुलाने से पार्षदों में भी रोष है। कई बार कांग्रेस व निर्दलीय पार्षद साधारण सभा बुलाने और उसमें जनसमस्याओं पर चर्चा करवाने की मांग कर चुके है। कांग्रेस पार्षद जावेद पडि़हार के अनुसार महापौर साधारण सभा की बैठक बुलाने से कतरा रही है। बैठक नहीं होने से पार्षद अपने वार्डो और आमजन को हो रही समस्याओं को सदन में नहीं रख पा रहे है। निर्दलीय पार्षद अनीता शर्मा के अनुसार जल्द साधारण सभा की बैठक आहूत कर जनसमस्याओं पर चर्चा होनी चाहिए। बैठक नहीं होने से निगम संबंधित काम भी अटक रहे है।

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