
बीकानेर अब देश-प्रदेश ही नहीं दुनिया में अपने उत्पादों की बेहतरीन गुणवत्ता के लिए ब्रांड बनकर उभरा है। कुछ मामलों में तो यह दुनिया में खास मुकाम हासिल कर चुका है। निर्यात अब नमकीन और मिठाई तक ही सीमित नहीं रहा। यहां से मूंगफली गोटा के साथ दो-तीन साल से मूंगफली तेल का निर्यात भी तेजी से बढ़ा है। कुल मिलाकर तकरीबन 20 प्रकार के प्रमुख उत्पादों का दुनिया के 25 से ज्यादा देशों में निर्यात हो रहा है। निर्यात का सालाना कारोबार तकरीबन एक हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा का है।
बीकानेर. हमारे शुष्क और रेतीले इलाके में औषधीय गुण वाले तीन ऐसे उत्पाद हैं, जो साल 2024 की दुनिया की टॉप 25 की सूची में शामिल हैं। यह हैं गोखरू, अश्वगंधा और मेथी। इनमें गोखरू बीकानेर और श्रीगंगानगर जिले में खरपतवार के रूप में बहुतायत में उगता है। इसे किसान एकत्र कर अतिरिक्त आय का जरिया बना रहे हैं। वहीं अश्वगंधा की खेती बीकानेर और नागौर से लगते इलाके में लोग करने लगे हैं। नागौर और इससे लगते बीकानेर क्षेत्र की दाणा मेथी की तो दुनिया में धाक है।
मेथी
- इसका उपयोग सब्जी व अन्य में फ्लेवर के रूप में तेजी से बढ़ा है।
- देश में 800 से 1000 करोड़ रुपए की मेथी का सालाना निर्यात।
- राजस्थान की निर्यात में 40 से 60 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी।
- नागौर और बीकानेर दाणा मेथी के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र।
अश्वगंधा
- देश से 400 से 500 करोड़ रुपए के अश्वगंधा का निर्यात।
- बीकानेर में भारत-पाक सीमा तक इसकी पैदावार।
- जड़ व पत्तियां औषधियों के काम आती हैं।
- 200 से 400 रुपए प्रति किलो बिकती है जड़।
गोखरू
- खरपतवार है, जिसे बोने की जरूरत नहीं पड़ती।
- शुष्क क्षेत्र जरूरी, बीकानेर और श्रीगंगागनगर में पैदावार।
- 200 से 300 करोड़ रुपए के गोखरू का सालाना निर्यात।
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रित्विक सेठिया, निर्यातक अश्वगंधा, मेथी व गोखरू
यह तीनों ही औषधीय गुण वाले पौधे हैं। दुनियाभर में कोविड के बाद से इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। अश्वगंधा इम्यूनिटी, स्टेमिना बढ़ाने और नींद बेहतर करने वाले औषधीय गुण रखता है। इसके निर्यात की ग्रोथ रेट 20-25 प्रतिशत तक है। इसी तरह गोखरू किसानों की अतिरिक्त आमदनी वाला खरपतवार है। इसकी ग्रोथ भी 15-17 प्रतिशत है। इसका कांटा 45 से 65 रुपए प्रति किलो तक के रेट पर मिलता है। टेस्टोस्टरोन बढ़ाने और औषिध में उपयोग किया जाता है। यह बीकानेर, श्रीगंगागनर में सर्वाधिक है। बाड़मेर और जैसलमेर में भी उत्पादन होता है। तीसरा उत्पाद दाणा मेथी है। जो नागौर की दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यह बीकानेर में भी खूब होती है। इसका निर्यात यहां से दुनिया के कई देशों को हो रहा है।
बीकानेर प्रदेश का सबसे बड़ा मूंगफली उत्पादक क्षेत्र है। अकेले बीकानेर मंडी में एक करोड़ बोरी मूंगफली का कारोबार होता है। पिछले कुछ सालों से मूंगफली और इसके गोटे का बीकानेर से निर्यात हो रहा है। पिछले साल मौसम की प्रतिकूलता और पेस्टीसाइड के प्रभाव से मूंगफली की क्वालिटी कमजोर रहने पर निर्यात पर जरूर असर पड़ा। अब दो-तीन साल से मूंगफली का तेल भी विदेशों में निर्यात किया जाने लगा है। जो अगले कुछ सालों में और बढ़ेगा।
- प्रदेश में 12 लाख टन मूंगफली का उत्पादन।
- चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया, यूरोप को निर्यात।
- करीब 7 लाख टन मूंगफली का उत्पादन बीकानेर।
Published on:
08 Aug 2024 03:00 pm

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