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बढऩे लगा सर्दी का अहसास, मन को भा रही केसरयुक्त दूध की मिठास

रियासतकाल से शहर में जगह-जगह लग रही दूध की कढ़ाई : शाम से रात तक कुल्हड़ दूध के शौकीनों की लगती है भीड़

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बढऩे लगा सर्दी का अहसास, मन को भा रही केसरयुक्त दूध की मिठास

बढऩे लगा सर्दी का अहसास, मन को भा रही केसरयुक्त दूध की मिठास

बीकानेर. दूध शरीर के लिए पौष्टिक है। शहर में सर्दी के दिनों में गर्म दूध की खपत और बढ़ जाती है। गली-मोहल्लों से चौक -चौराहों और मुख्य मार्गो पर लगनी वाली दूध की कड़ाई पर शाम से देर रात तक दूध पीने के शौकिनों की भीड़ लगी रहती है। बताया जा रहा है कि शहर में कड़ाई दूध की बिक्री का चलन रियासतकाल से है। सर्दी के मौसम में केसर, इलायची और मलाईदार युक्त दूध को पीने के लिए लोग प्रतिदिन इन स्थानों पर पहुंचते है। जिन मोहल्लों में केसर युक्त दूध की कढ़ाई लगती है, वहां दूध की महक हर किसी के मन को ललचाती है। शहर के परकोटा क्षेत्र में नवबंर से मार्च तक विभिन्न स्थानों पर कड़ाई दूध की बिक्री परवान पर रहती है।


लकड़ी -थेपड़ी से तैयार
खाद्य पदार्थो को तैयार करने के लिए भले ही एलपीजी, डीजल और इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग हो रहा हो, लेकिन कढ़ाई दूध पारंपरिक रूप से लकड़ी और गोबर के उपलो व थेपड़ी पर ही गर्म होता है। दूध में केसर व इलायची मिश्रित कर और चीनी की मिठास के साथ मिट्टी के कुलड़ में दूध का स्वाद और बढ़ जाता है। पहले मिट्टी ग्लास का प्रचलन था। अब कांच व डिस्पोजल ग्लासों का उपयोग हो रहा है।


आयोजन में बढ़ा चलन :

शहर में शादी -विवाह के आयोजनों में भी कढ़ाई दूध का चलन अब बढ़ गया है। विभिन्न प्रकार की मिठाइयों और व्यंजनों के साथ कढ़ाई दूध की उपलब्धता प्रमुखता से की जा रही है। मेहमान विभिन्न व्यंजनों का स्वाद चखने के साथ कड़ाई दूध जरुर पीते है।


प्रमुख दुकानें :

सर्दी के दिनों में कड़ाई दूध की मांग अधिक बनी रहती है। शहर में लगभग डेढ दर्जन से भी अधिक स्थानों व दुकानों पर कढ़ाई दूध की बिक्री होती है। इनमें जस्सूसर गेट के बाहर, दम्माणी चौक, नत्थूसर गेट के बाहर, सदाफते, बड़ा बाजार सब्जी बाजार, सट्टा बाजार गली, भुजिया बाजार, कोटगेट सहित कई जगह कढ़ाई दूध दुकानें लगती हैं।


दूध से बढ़ी ख्याति, पीढ़ी दर पीढ़ी काम
दूध की कढ़ाई के व्यवसाय से कई परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी जुड़े हुए है। दम्माणी चौक में दूध की कड़ाई लगाने वाले पवन कुमार जोशी बताते है कि दूध से बनने वाली मलाई, मलाई लड्डू, पेड़ा के काम में पूरा
परिवार जुटा रहता है। जोशी बताते है कि उनके पड़दादा, फिर दादा, पिता और अब पवन स्वयं इस काम से जुड़े हुए है। जोशी के अनुसार सर्दियों के मौसम में उनकी दुकान पर रोज एक क्विंटल कढ़ाई दूध की बिक्री होती है।

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