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पेयजल के लिए किसानों ने नहर से निकाली मिट्टी

पेयजल के लिए किसानों ने नहर से निकाली मिट्टी

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पेयजल के लिए किसानों ने नहर से निकाली मिट्टी

पेयजल के लिए किसानों ने नहर से निकाली मिट्टी

छत्तरगढ़. इंसान किसी काम को करने की ठान ले तो फिर कोई बाधा सामने नहीं आती। कुछ ऐसा ही कर काम कर दिखाया छत्तरगढ़ क्षेत्र की कुमटा नहर के सीएचडी माइनर के किसानों ने। किसानों ने अपने खेतों में पेयजल लाने के लिए मंगलवार को किसानों ने करीब पांच घंटे तक नहर की सफाई की। किसानों ने करीब एक किलोमीटर लंबी नहर की साफ-सफाई कर पानी के बहाव के लिए दुरुस्त दिया। मिट्टी व झाडिय़ों के कारण सीएचडी माइनर दूर से दिखाई भी नहीं देती थी। नहर में मिट्टी और घास भरने के कारण पानी का बहाव रुक गया था। मंगलवार सुबह को किसानों और ग्रामीणों ने फावड़ा लेकर पसीना बहाया।


गौरतलब है कि सिंचाई विभाग की ओर से हाथ खड़े कर देने पर किसानों ने एक टोली बनाकर कुमटा नहर के सीएचडी माइनर की 46 से 47 आरडी तक माइनर को पानी का बहाव आने के लिए मिट्टी को निकाला। साथ ही छह व सात सीएचडी के किसानों ने नहर की सफाई की। इससे पूर्व गत सोमवार को किसानों ने बैठक की थी। इस दौरान किसानों सिंचाई विभाग व तहसीलदार को माइनर में मिट्टी होने कारण अन्तिम छोर पर बैठे किसानों को पीने का पानी नहीं पहुंचने को लेकर ज्ञापन सौंपा था लेकिन सिंचाई विभाग की पिछले एक महीने से मिट्टी निकालने को लेकर अनदेखी व बजट नहीं होने को लेकर हाथ खड़े करने बाद किसानों ने सोमवार रात्रि को नहर की सफाई करने पर विचार हुआ था। इसके बाद मंगलवार को नहर की मरम्मत का काम शुरू किया गया।


किसानों ने पांच-छह घंटे तक धूप में पसीना बहाया। इस दौरान ओमप्रकाश गोदारा, लालचन्द गोदारा,राजाराम, रामप्रताप, नारायण, कालुराम, तरसेम सिंह, हेतराम, अन्नाराम, मदनलाल, सुभाष, विनोद, फेजु खां, रामस्वरूप, महावीर, तेजाराम, श्योपतराम, जेलाराम भेराराम आदि किसानों ने श्रमदान किया।