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गोद में आते है चहक उठता है वंश, मुस्कान बिखेर रही चंचल

- महिला नर्सिंग स्टाफ दो लावारिस बच्चों पर उड़ेल रहे प्यार - पीबीएम के शिशु अस्पताल की एनआइसीयू में भर्ती दो बच्चे

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गोद में आते है चहक उठता है वंश, मुस्कान बिखेर रही चंचल

गोद में आते है चहक उठता है वंश, मुस्कान बिखेर रही चंचल

बीकानेर. जब एक दरवाजा बंद करता है तो भगवान दूसरा दरवाजा खोल देता है। ऐसा पीबीएम के शिशु अस्पताल की एनआइसीयू में भर्ती दो लावारिस बच्चों के मामले में देखने को मिल रहा है। इन दोनों को जन्म देने वाले लावारिस छोड़ गए थे। अब मां के दुलार के साथ देखभाल महिल नर्सिंगकर्मी कर रही है। इतना ही नहीं डेढ़ महीने से भर्ती बच्चा (वंश) महिला नर्सिंगकर्मी की गोद में आते ही चहक उठता है। नर्सिंग में २० से अधिक बच्चे हैं लेकिन, चिकित्सकों के काउंटर के पास लगे पालने में दोनों लावारिस बच्चे लेटे हुए हैं। बच्चों की देखभाल की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी एक वरिष्ठ नर्सिंगकर्मी को दी हुई है।

बच्चों को देखकर भर आती हैं आंखें
बच्चों की देखभाल करनी वाली महिला कार्मिक बताती हैं कि नर्सरी में दो लावारिस बच्चे हैं, जिनकी देखभाल अपने बच्चों से बढ़कर कर रहे हैं। बच्चों को देखकर कई बार आंसु छलक पड़ते हैं। इन बच्चों का क्या कसूर जो इन्हें मरने के लिए छोड़ दिया। बच्चों पर बहुत दया आती है। हम अपनी तरफ से बच्चों का पूरा ख्याल रखते हैं। एक कार्मिक ने बताया हनुमानगढ़ से आया बच्चा बेहद सीधा है। बीमारी के कारण थोड़ा सुस्त रहता है। जब उसे यहां लाया गया ज्यादा गंभीर था लेकिन, अब धीरे-धीरे तबीयत में सुधार हो रहा है। वहीं पांच दिन पहले आई लड़की बेहद चंचल है। वह पालने में बार-बार पलटी मारती रहती है। उसे देखते ही हर किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। एेसे में सब उसे चंचल नाम से पुकारने लगे है।

बच्चों को गोद लेने के लिए कई इच्छुक

अस्पताल सूत्रों के अनुसार एनआइसीयू में हाल ही पांच दिन पहले आई लावारिस बच्चों को गोद लेने के लिए कई लोग आ चुके हैं लेकिन, बच्चों को गोद देने का काम अन्य विभाग का है। ऐसे में लोग संबंधित विभाग से संपर्क कर चुके हैं। गोद देने की प्रक्रिया बेहद लंबी व जटिल हैं।

३४ दिन से एनआइसीयू में वंश

हनुमानगढ़ से १९ दिन का लावारिस शिशु वंश के सिर में पानी भरने एवं संक्रमण के चलते शिशु अस्पताल में रेफर होकर आया। पिछले ३४ दिनों से एनआइसीयू में बच्चा भर्ती हैं, जिसके स्वास्थ्य में पहले से सुधार है। बच्चा शिशु अस्पताल में २९ जुलाई को भर्ती हुआ। बच्चे की खून की जांच, एमआरआइ एवं ब्रेन के इंफेक्शन की जांच की गई। बच्चे के सिर में पानी भरने एवं संक्रमण था। संक्रमण के चलते ही हनुमानगढ़ की जिला अस्पताल से बच्चे को शल्य चिकित्सा एवं अग्रिम इलाज के लिए भेजा गया था।

पांच दिन से बच्ची भर्ती

पीबीएम अस्पताल के सामने सरकारी क्वाटर्स के पीछे भैरुंजी चौकी के पास नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली। बच्ची को चिंटियों ने काट लिया था। बच्ची का वजन एक किलो २०० ग्राम था। बच्ची की सभी जरूरी जांचें कराई गई जो नॉर्मल आई है। बच्ची दूध पी रही है।

बच्चों की हालत में सुधार

एनआइसीयू में दो लावारिस बेबी भर्ती हैं। बच्ची स्वस्थ है। हनुमानगढ़ से रेफर होकर आए बच्चे के सिर में पानी भरने से संक्रमण हो गया। शल्य चिकित्सा के लिए रेफर किया गया था। यहां बच्चे की खून व एमआरआइ की जंाचें कराई। ३४ दिन इलाज चलने के बाद बच्चे की हालत में काफी सुधार है। अब बच्चे का वजन भी ३०० ग्राम बढ़ गया हैं। न्यूरो सर्जन को दिखाया, उन्होंने भी शल्य चिकित्सा की जरूरत नहीं बताई। अब पीबीएम अधीक्षक को पत्र लिखकर बच्चे को वापस शिफ्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरके सोनी, प्रभारी चतुर्थ यूनिट शिशु रोग विभाग