
मंदिरों में हुए अन्नकूट के आयोजन
बीकानेर. 'अन्नकूट कोटिन भातन सौं भोजन करत गोपाल...भगवान कृष्ण के लिए नाना-प्रकार के पकवान और व्यंजन बनाकर भोग लगाया गया है। तो दूसरी ओर मानभंग होने के बाद इंद्रदेव अरदास कर रहे है कि 'अब ना छाडो चरण कमल महिमा मैं जानी सुरपति तेरो नामधरो...सोमवार को कीर्तनकारों ने अन्नकूट के पद सुनाकर ठाकुरजी को रिझाया। वैष्णव मंदिरों में सोमवार को अन्नकूट मनोरथ साकार हो उठे।
मंदिरों में गोबर से भगवान गोवर्धन की आकृति उकेर कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। मान्यता के अनुसार जब भगवान कृष्ण ने इंद्र का मानभंग किया था, तो उसके बाद ब्रजवासियों ने ठाकुरजी को चावल सहित अन्य खाद्य सामग्री को पर्वत(अन्नकूट) का आकार बनाया और कई प्रकार की मिठाइयां, नमकीन व अन्य खाद्य सामग्री का भोग ठाकुरजी के लगाया गया था। इसके बाद से ही वैष्णव मंदिरों में दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट मनोरथ की परम्परा शुरू हो गई।
रघुनाथसर कुआं स्थित वैष्णव मंदिर गिरिराजजी में गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया गया। पुजारी मनोज श्रीमाली ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यहां गोवर्धन भगवान के दर्शन किए। इसके अलावा प्राचीन दाऊजी मंदिर, बि_लनाथ मंदिर, सहित कई मंदिरों में अन्नकूट के मनोरथ हुए। बिस्सा चौक स्थित द्वारिकाधीश में आंवला नवमी के दिन अन्नकूट का मनोरथ होगा।
Published on:
30 Oct 2019 12:09 am
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