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39 वाटर पॉइंट पर हो रही है वन्यजीवों की गणना

39 वाटर पॉइंट पर हो रही है वन्यजीवों की गणना
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छतरगढ़ उप वन संरक्षक के अंतर्गत 39 वाटर पॉइंट पर हो रही है वन्यजीवों की गणना, निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी

छतरगढ़ उप वन संरक्षक के अंतर्गत 39 वाटर पॉइंट पर हो रही है वन्यजीवों की गणना, निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी

39 वाटर पॉइंट पर हो रही है वन्यजीवों की गणना

दो साल बाद कोरोना का साया छंटने के बाद सोमवार सुबह 8 बजे से जिले में अनेक स्थानों पर वन्य जीवों की गणना शुरू की गई। यह गणना चौबीस घंटे चलती है, ऐसे में मंगलवार सुबह 8 बजे तक जल स्रोतों पर वन्य जीवों को गिना जाएगा। इसे लेकर दो दिन पहले वन विभाग तथा जन्तुआलय के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर वन्यजीवों की गणना का तरीका समझाया गया। गणना के लिए विभाग के अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा गया है। जिले में जोड़बीड़, गजनेर, दियातरा, कोलायत, खाजूवाला, देशनोक, छत्तरगढ़ आदि स्थानों पर मचान बनाकर वन्य जीवों की गणना शुरू की गई है।

39 वॉटर पॉइंट बनाए
छतरगढ़ उप वन संरक्षक कार्यालय के अंतर्गत 39 वाटर पॉइंट पर कर्मचारियों व वॉलंटियर के माध्यम से गणना की जा रही है। इसका निरीक्षण करने छत्तरगढ़ मुख्य वन संरक्षक सुरेश कुमार आबूसरिया व दंतौर क्षेत्रीय वन अधिकारी सुरेन्द्र पाल मीणा पहुंचे। उन्होंने वन्यजीव आंकलन स्थानों का निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिए। डीएफओ सुरेश कुमार ने कहा कि कोरोना काल के चलते दो साल से वन्यजीवों की गणना नहीं हो पा रही थी। अब 30 मई तक वन्यजीवों के आंकड़े संकलित कर भेजे जाएंगे। कई स्थानों पर कैमरा ट्रैप पद्धति से, तो कई स्थानों पर वॉलंटियर की मदद से गणना की जा रही है।

जटिल है प्रक्रिया
वन्य जीवों की संख्या का सटीक आंकलन करना जटिल प्रक्रिया है। इस पद्धति का नाम वन्यजीव गणना के बजाय वन्यजीव आंकलन और वाइल्ड लाइफ सेंसस की जगह वाइल्डलाइफ ऐस्टीमेशन दिया गया है।