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गोरखपुर से भी बदहाल पीबीएम : 35 डॉक्टरों के खिलाफ भ्रष्टाचार की रिपोर्ट तैयार

35 डॉक्टरों पर कमीशनखोरी में लिप्त होने जैसे गंभीर आरोप लगे है, 23 डॉक्टर्स-कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी

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गोरखपुर से भी बदहाल पीबीएम

पीबीएम अस्पताल में कुल डॉक्टरों में से 35 डॉक्टरों की ऐसी सूची राज्य सरकार को भेजी गई है, जिनके नाम के साथ भ्रष्टाचार का विवरण दिया गया है। इसमें चिकित्सकों के कमीशनखोरी में लिप्त होने तथा अपने फायदे के लिए मरीज पर प्रोपोगेंडा कंपनियों की दवाएं खरीदने के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। रिपोर्ट में सूचीबद्ध डॉक्टरों और नर्सिंग कार्मिकों में से कुल 23 डॉक्टर्स एवं कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है।

सरकार को भेजी गई सूची में डॉक्टरों पर कमीशन लेने, विभाग को अपने हिसाब से चलाने, घर के पास अपने आदमी की दुकान खुलवाने व सभी दवाएं इसी दुकान से लेने के लिए मरीज को बाध्य करने, मनचाही लैब से जांच करवाने, मेडिकल स्टोर से सांठ-गांठ कर दवाएं लिखने, प्राइवेट अस्पताल में काम करने, प्रोपोगेंडा कंपनियों की दवाएं बड़ा कमीशन लेकर लिखने, झूठी जांच लिखने जैसे आरोप है। ऐसे ही २९ नर्सिंगकर्मियों की सूची में पद का गलत उपयोग करने, नेतागिरी करने, मरीज को जबरदस्ती रेफर करने, कमीशनखोरी में शामिल होने समेत अन्य आरोप हैं।


फर्म को ब्लैक लिस्ट करने की अनुशंसा
राज्य सरकार को भेजी रिपोर्ट में एमआरआई एवं सीटी स्केन तथा ईको व ईसीजी अनुबंध की जांच कर आरएमआरएस की बैठक में समीक्षा कर अनुबंध को निरस्त किया करने, संबंधित फर्म को ब्लैक लिस्ट करने की अनुशंसा की गई है। अनुशंसा में कहा गया है कि पीबीएम अस्पताल में एसपी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एवं मेडिकल विवि के कुलपति

डॉ. राजा बाबू से संबंधित फर्म होने की वजह से इस फर्म को अनुचित लाभ देकर राजहित के विरुद्ध कार्य करने वाले कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। बताया जाता है कि पूर्व में जब यह सूची प्रमुख शासन सचिव (स्वास्थ्य ) के ध्यान में लाई गई तो उनका कहना था कि इनके खिलाफ कार्रवाई से तो अस्पताल ही खाली हो जाएगा।

इनका कहना है
पीबीएम अस्पताल के संदर्भ में रिपोर्ट बनाकर सरकार को भिजवाई जा चुकी है।
डॉ. राकेश कुमार शर्मा, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त


नौकरी यहां, काम खुद का
पीबीएम अस्पताल के 14 ऐसे कार्मिक सूचीबद्ध किए गए हैं, जो अटेंडेंट, स्टोर इंचार्ज, लिपिक आदि पद पर कार्यरत हैं। इनमें से कुछ पर आरोप है कि ओटी का सामान चोरी करके बाहर बेचते हैं। नौकरी पीबीएम में करते हैं और खुद का काम करते हैं। कई भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। 10 फार्मासिस्ट की भी कमीशन की शिकायतें हैं। 18 लपके या दुकानों के एजेंट सूचीबद्ध किए गए हैं।

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