
दीक्षांत समारोह
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय का 22वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार को आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के विद्या मंडप में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में 1694 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई। कुलगुरु प्रोफेसर राजेंद्र बाबू दुबे ने 22 में दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं प्रेषित की। डॉ. दुबे ने कहा कि दीक्षांत का अवसर विद्यार्थियों के ज्ञान परिश्रम और समर्पण की उपलब्धियों का उत्सव मनाने का है। इस अवसर एक नये संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए तैयार हों। डॉ. दुबे ने कहा कि 39 वर्षों से विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, शोध और प्रसार के क्षेत्र के कार्य कर किसानो की समृद्धि का वाहक बना है। उन्होंने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। डॉ दुबे ने कहा कि बीज उत्पादन के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने प्रतिबद्धता से कार्य करते हुए गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन और वैरायटी विकसित करने की दिशा में अनुसंधान कार्य किए हैं। उद्यमिता विकास के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत हर्बल गार्डन विकसित करने की योजना विश्वविद्यालय के लिए स्वीकृत की गई है। विश्वविद्यालय के कृषि यंत्र मशीनरी परीक्षण व प्रशिक्षण केंद्र में किसानों की सुविधा के लिए कस्टम हैरियर सेंटर भी खोला गया है। जिससे सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी उचित दर पर उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में 1 हेक्टेयर भूमि पर खजूर का प्रदर्शन ब्लॉक स्थापित किया गया है। इसके अतिरिक्त पीबीसी भारत ड्रोन के साथ विश्वविद्यालय द्वारा एमओयू किया गया है, जिसके तहत ड्रोन पायलट सर्टिफिकेट कोर्स शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।
अपने ज्ञान का मानवता के लिए सही दिशा में इस्तेमाल करने का आह्वान
दीक्षांत अतिथि अध्यक्ष पादप किस्मों के संरक्षण एवं किसान अधिकार प्राधिकरण, कृषि एवं कृषि कल्याण मंत्रालय भारत सरकार, डॉ त्रिलोचन मोहपात्रा ने विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह की बधाई दी और कहा कि शिक्षा और शिक्षक समाज, राष्ट्र और मानवता के उत्थान के लिए आधार तैयार करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियो से अपने ज्ञान का मानवता के लिए सही दिशा में इस्तेमाल करने का आह्वान किया। डॉ. मोहपात्रा ने कहा कि सीमित जल संसाधनों, उच्च तापमान, शुष्क जलवायु जैसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सरसों , बाजरा, मूंगफली सहित कई फसलों के उत्पादन में राजस्थान महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक कृषि प्रौद्योगिकी व वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाई जा रही है। कृषि, किसान का जीवन स्तर सुधारने तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में ड्रोन तकनीक, सैटेलाइट आधारित निगरानी, सेंसर आधारित सिंचाई प्रणाली, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण साधन हो सकते हैं। युवा सैद्धांतिक ज्ञान के साथ फील्ड नोलेज सीखें, बीज उत्पादन जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। युवा नौकरी खोजने के बजाय नौकरी देने वाले बनें।
1694 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधियां
दीक्षांत समारोह में कृषि संकाय, सामुदायिक विज्ञान संकाय और आईएबीएम के कुल 1694 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। इनमें कृषि संकाय के अंतर्गत स्नातक (यूजी) के 1475, स्नातकोत्तर (पीजी) के 52 और विद्या वाचस्पति ( पीएचडी) के 31 विद्यार्थी शामिल हैं। सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के स्नातक के 21, स्नातकोत्तर के 19 और विद्या वाचस्पति के 06 विद्यार्थी शामिल हैं। एआईबीएम में स्नातकोत्तर के 89 तथा पीएचडी के एक विद्यार्थी को उपाधि प्रदान की गई। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को विश्वविद्यालय की डाक्टरेट ऑफ साइंस की मानद उपाधि प्रदान की गई। रजिस्ट्रार डॉ. देवाराम सैनी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इन्हें मिला स्वर्ण पदक
कल्पिता जोशी, अंकित कुमार, अंजलि, महिमा त्रिवेदी, निधि कुमारी, अनुराधा, भव्या अग्रवाल, पिंकी चौधरी, किरण कुमारी, रेणु राठौड़, संजय, कृष्ण यादव, यामिनी सारस्वत, अंजलि सोलंकी, कैलाश पटेल, को विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
Published on:
13 Mar 2026 08:31 pm
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